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ग्रेनो में इंजीनियर की मौत पर ऐक्शन; जेई टर्मिनेट, दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में कोहरे के कारण 20 फुट गहरे गड्ढे में गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में ताबड़तोड़ एक्शन सामने आए हैं। जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को टर्मिनेट कर दिया गया है। 

Mon, 19 Jan 2026 01:15 AMKrishna Bihari Singh भाषा, नोएडा
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ग्रेनो में इंजीनियर की मौत पर ऐक्शन; जेई टर्मिनेट, दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में 20 फुट गहरे पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में ताबड़तोड़ ऐक्शन सामने आए हैं। अथॉरिटी ने नोएडा ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को टर्मिनेट कर दिया है। यही नहीं सेक्टर-150 में ट्रैफिक से जुड़े काम के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सीईओ ने संबंधित विभागों को लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य पर रिपोर्ट तलब किया है।

जेई टर्मिनेट, दो को कारण बताओ नोटिस

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने सड़क पर ब्लिंकर और संकेतक नहीं होने की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। उन्होंने ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक और प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही लापरवाही बरतने के आरोप में क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है।

लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. ने साफ किया है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा को लेकर लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों की परियोजनाओं की जांच करें और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करें।

कैसे हुआ हादसा?

बताया जाता है कि हादसा कोहरे के कारण हुआ। अनियंत्रित होकर कार गड्ढे में गिर गई जिसमें 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई। युवराज मेहता सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। वह गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। वह शनिवार को तड़के काम से घर लौट रहे थे तभी कोहरे के कारण उनकी कार गड्ढे में जा गिरी।

बेसमेंट के लिए खोदा गया था गड्ढा

नॉलेज पार्क थाने के अनुसार, सेक्टर 150 में निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में कार गिरने की खबर देर रात करीब सवा 12 बजे मिली थी। सूचना मिलते ही तलाशी अभियान शुरू किया गया और दमकल विभाग, SDRF, NDRF और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मिलकर शनिवार को सुबह डेड बॉडी को बाहर निकाला।

बचाव में देरी का आरोप

चश्मदीद डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में देरी हुई और अगर समय पर मदद मिलती तो इंजीनियर की जान बच सकती थी। मोनिंदर ने बताया कि वह रात करीब पौने दो बजे वहां पहुंचा और देखा कि ठंड और पानी में लोहे की छड़ें होने से बचाव दल पानी में जाने से हिचकिचा रहा था। इसके बाद मोनिंदर ने खुद अपनी कमर में रस्सी बांधी और पानी में उतरकर करीब 30 मिनट तक युवक और उसकी कार की तलाश की।

कार पर खड़े होकर मदद मांगता रहा युवक

मोनिंदर ने आरोप लगाया कि युवराज मेहता को कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च से लोगों को इशारा करते और मदद मांगते देखा गया था। उसने कहा कि अगर मदद 10 मिनट पहले मिल जाती तो युवक की जान बच सकती थी। चश्मदीद ने यह भी बताया कि इससे पहले स्थानीय लोगों ने उसी गड्ढे से एक ट्रक ड्राइवर को सुरक्षित निकाला था। वहीं अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्रा ने पुलिस की लापरवाही से इनकार किया है।

अंधेरे और कोहरे से बचाव कार्य प्रभावित

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने युवक को बचाने की पूरी कोशिश की। बचाव कार्य के लिए क्रेन, सीढ़ी, नाव और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया लेकिन अंधेरे और कोहरे के कारण दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। कानून के अनुसार दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दो डेवलपर्स के खिलाफ केस दर्ज

सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने बताया कि घटना के संबंध में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पिता राज कुमार मेहता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से नाले के पास बैरिकेड, रिफ्लेक्टर लगाने का कई बार अनुरोध किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी लापरवाही के कारण इलाके में दुर्घटनाएं होती हैं।

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लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

रविवार शाम को स्थानीय निवासियों ने युवराज मेहता के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हादसे के लिए प्रशासन और बिल्डरों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए घटनास्थल पर बैरिकेड लगा दिए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, घना कोहरा और कार की तेज रफ्तार दुर्घटना की मुख्य वजह हो सकती है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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