राजस्थान के चर्चित टिल्लू हत्याकांड में बड़ा मोड़, दौसा में तीन लेन बंद; हाईवे पर 90 मीटर खुदाई
साल 2020 के चर्चित टिल्लू उर्फ प्रिंस हत्याकांड में सोमवार को जांच ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने एक बार फिर इस केस को सुर्खियों में ला खड़ा किया। बड़ा गांव क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर करीब 90 मीटर के दायरे में निशान लगाकर खुदाई शुरू की गई।

साल 2020 के चर्चित टिल्लू उर्फ प्रिंस हत्याकांड में सोमवार को जांच ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने एक बार फिर इस केस को सुर्खियों में ला खड़ा किया। बड़ा गांव क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर करीब 90 मीटर के दायरे में निशान लगाकर खुदाई शुरू की गई। मिलिंग मशीन से सड़क की परतें उखाड़ी जा रही हैं और गहराई तक वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल की जा रही है।
करीब छह साल से लापता प्रिंस उर्फ टिल्लू की तलाश में यह कार्रवाई परिजनों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। मौके पर भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा और पूरे ऑपरेशन को सुरक्षा घेरे में अंजाम दिया गया।
ड्रोन सर्वे के बाद चिन्हित हुए स्पॉट
सूत्रों के मुताबिक, पीपल के पेड़ के सामने वाले हिस्से में पूर्व में सीपीआर मशीन के जरिए दो से तीन स्थानों को चिन्हित किया गया था। हाल ही में किए गए ड्रोन सर्वे और पहले की जांच रिपोर्टों के आधार पर उन्हीं बिंदुओं को फोकस में रखते हुए खुदाई शुरू की गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कोई सामान्य खुदाई नहीं, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही गहन जांच है। सड़क की ऊपरी लेयर को हटाकर नीचे की मिट्टी और संरचना की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित साक्ष्य को नजरअंदाज न किया जाए।
हाईवे की तीन लाइनें बंद, यातायात प्रभावित
खुदाई के चलते हाईवे की पांच में से तीन लेन अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं। दो लेनों से यातायात संचालित किया गया। मौके पर दौसा एडिशनल एसपी योगेंद्र फौजदार और बांदीकुई थाना अधिकारी जहीर अब्बास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। सुबह से शाम तक मशीनों की गड़गड़ाहट और पुलिस की सख्त निगरानी के बीच यह ऑपरेशन चलता रहा।
2020 से न्याय की आस में परिवार
टिल्लू उर्फ प्रिंस वर्ष 2020 में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुआ था। तभी से परिवार उसके शव की बरामदगी और मामले में सच्चाई सामने आने की मांग कर रहा है। माता-पिता की आंखों में अब भी वही सवाल है—“हमारे बेटे के साथ आखिर हुआ क्या?”
परिजनों का कहना है कि जब तक बेटे का शव नहीं मिलता, तब तक उनका इंतजार खत्म नहीं होगा। वे चाहते हैं कि कम से कम अंतिम संस्कार तो कर सकें। सोमवार को खुदाई शुरू होते ही परिवार मौके के आसपास डटा रहा। हर मशीन की आवाज के साथ उनकी धड़कनें भी तेज होती रहीं।
बच्चों को गाड़े जाने की आशंका
परिवार ने आरोप लगाया है कि कृष्ण और अनिल नामक व्यक्तियों द्वारा बच्चों को गाड़े जाने की आशंका के चलते ही यह स्थान चिन्हित किया गया है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इस केस में पहले भी कई बार जांच की दिशा बदली, लेकिन ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका। ऐसे में हाईवे पर 90 मीटर के क्षेत्र में हो रही खुदाई को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
क्या मिलेगा कोई सुराग?
जांच एजेंसियां इस बात को लेकर सतर्क हैं कि यदि यहां से कोई भी भौतिक साक्ष्य मिलता है तो वह केस की दिशा पूरी तरह बदल सकता है। विशेषज्ञों की टीम भी मौके पर बुलाई जा सकती है, ताकि संभावित अवशेष या अन्य सामग्री की फोरेंसिक जांच की जा सके।
स्थानीय लोगों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। हाईवे पर रुक-रुक कर गुजरते वाहनों के बीच लोग सवाल कर रहे हैं—क्या छह साल बाद सच जमीन के नीचे से बाहर आएगा?
फिलहाल पूरा इलाका पुलिस निगरानी में है और खुदाई का काम चरणबद्ध तरीके से जारी है। परिजनों की निगाहें सड़क की हर उखड़ती परत पर टिकी हैं।
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