जयपुर के चौराहों पर मंत्री ऑन ड्यूटी; स्टूडेंट्स संग ट्रैफिक संभालते दिखे कर्नल राज्यवर्द्धन
राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। आमतौर पर फाइलों और बैठकों में व्यस्त रहने वाले कैबिनेट मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ खुद सड़क पर उतर आए।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। आमतौर पर फाइलों और बैठकों में व्यस्त रहने वाले कैबिनेट मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ खुद सड़क पर उतर आए। हाथ में सीटी, सामने ट्रैफिक का शोर और साथ में स्कूली स्टूडेंट्स—मंत्री ने झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था संभालकर संदेश दिया कि बदलाव केवल नियमों से नहीं, व्यवहार से आता है।
सिरसी रोड, विजय द्वार और वैशाली नगर चौराहे पर मंत्री राठौड़ ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के साथ खड़े होकर यातायात संचालन किया। इस दौरान स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी मौके पर रहकर ट्रैफिक मैनेजमेंट को समझा। बच्चों ने राहगीरों और वाहन चालकों से संवाद किया और नियमों का पालन करने की अपील की।
बच्चों ने देखा ट्रैफिक की असली तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने छात्रों से पूछा—“जब किसी ने आपकी बात नहीं मानी तो कैसा लगा?” इस पर बच्चों ने बेबाक जवाब दिया कि उनकी आंखों के सामने जब कुछ वाहन चालक सिग्नल तोड़ते या नियमों की अनदेखी करते दिखे, तो उन्हें बुरा लगा।
छात्रों ने कहा कि आज उन्हें समझ आया कि एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी दिनभर धूप, धूल और शोर के बीच खड़े रहकर शहर की रफ्तार को नियंत्रित करता है। यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा जरूरी व्यवहार
मंत्री राठौड़ ने मौके पर कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार सिर्फ फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कों से नहीं होगा। असली बदलाव तब आएगा जब लोग खुद नियमों का पालन करना अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। उन्होंने पुलिस और गृह विभाग से अपील की कि स्टूडेंट-पुलिस इंटर्नशिप कार्यक्रम सालभर चलाया जाए, ताकि नई पीढ़ी को ट्रैफिक अनुशासन की समझ व्यावहारिक रूप से मिल सके।
उनका कहना था कि अगर बच्चे छोटी उम्र में ही ट्रैफिक मैनेजमेंट की बारीकियां सीख जाएंगे, तो वे भविष्य में नियमों की अवहेलना नहीं करेंगे।
नियम मानने वालों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान केवल उल्लंघन पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि ट्रैफिक नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों का अभिनंदन भी किया गया। हेलमेट पहनने वाले और सीट बेल्ट लगाने वाले ड्राइवरों को धन्यवाद देकर सम्मानित किया गया। यह पहल सकारात्मक संदेश देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
हर सप्ताह सड़क पर दिखेंगे मंत्री
राठौड़ ने घोषणा की कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं रहेगा। पूरे महीने हर सप्ताह एक दिन वे स्टूडेंट्स के साथ चौराहों पर उतरकर ट्रैफिक पुलिस की मदद करेंगे और युवाओं को ट्रैफिक प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
राजस्थान जैसे तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते राज्य में ट्रैफिक एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जयपुर में बढ़ते वाहनों का दबाव, व्यस्त चौराहे और बदलती लाइफस्टाइल के बीच यह पहल एक प्रयोग के तौर पर देखी जा रही है।
सामाजिक संदेश के साथ सियासी संकेत
राजनीतिक जानकार इसे जनसंपर्क से जोड़कर भी देख रहे हैं, लेकिन सड़क पर मंत्री की मौजूदगी ने आमजन का ध्यान जरूर खींचा। कई राहगीर रुककर इस पहल को देखने लगे। बच्चों के साथ मंत्री की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर संवाद का रूप दे दिया।
राजस्थान की सड़कों पर अक्सर ट्रैफिक जाम और नियम उल्लंघन की खबरें सुर्खियों में रहती हैं। ऐसे में यदि यह पहल लगातार चलती है और स्कूल स्तर पर ट्रैफिक शिक्षा को मजबूती मिलती है, तो आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर दिख सकता है।
कुल मिलाकर, जयपुर के चौराहों पर गुरुवार का दिन केवल ट्रैफिक कंट्रोल का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जागरूकता का संदेश देने वाला रहा। मंत्री की सीटी और बच्चों की सीख—दोनों ने मिलकर यह याद दिलाया कि सड़क पर अनुशासन ही सुरक्षा की पहली शर्त है।
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