एक को ठोकेंगे तो...राजस्थान में बढ़ते अपराध पर MLA रविन्द्र सिंह भाटी ने सदन में बताया फॉर्मूला
राजस्थान की शांत फिजाओं में अब ‘इंटरनेट कॉलिंग’ और ‘रंगदारी’ का जहर घुलने लगा है। कभी मेहमाननवाजी और सामाजिक सौहार्द के लिए पहचाना जाने वाला यह प्रदेश संगठित अपराधियों के निशाने पर है।

राजस्थान की शांत फिजाओं में अब ‘इंटरनेट कॉलिंग’ और ‘रंगदारी’ का जहर घुलने लगा है। कभी मेहमाननवाजी और सामाजिक सौहार्द के लिए पहचाना जाने वाला यह प्रदेश संगठित अपराधियों के निशाने पर है। मंगलवार को राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल में निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इसी मुद्दे पर सरकार को घेरा और कानून-व्यवस्था पर कड़े तेवर दिखाए। उनका कहना था कि अगर “रक्तरंजित राजस्थान” को बचाना है तो अब केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा—यूपी-बिहार और मुंबई की तर्ज पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।
‘एक को ठोकेंगे तो 100 में जाएगा मैसेज’
भाटी के संबोधन का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा, जब उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह विभाग को ‘एनकाउंटर’ और ‘बुलडोजर’ जैसी कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया। सदन में उन्होंने कहा, “हमें यूपी-बिहार और मुंबई की तर्ज पर गैंगस्टर्स को ठोकने की आवश्यकता है। एक को ठोक देंगे तो बाकी 100 में मैसेज जाएगा कि राजस्थान की धरती पर अपराध किया तो खैर नहीं।”
उनका साफ इशारा था कि अपराधियों के मन में कानून का नहीं, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों का खौफ होना चाहिए। भाटी ने यह भी मांग की कि जो लोग स्थानीय स्तर पर इन गैंग्स की मदद कर रहे हैं, उनकी पहचान कर संपत्ति कुर्क की जाए और सामाजिक बहिष्कार तक की कार्रवाई हो।
परचून की दुकान से बड़े प्रतिष्ठान तक—हर कोई निशाने पर
विधायक ने व्यापारियों की बेबसी का चित्रण करते हुए कहा कि अब हालात ऐसे हैं कि “अगर किसी की परचून की दुकान भी अच्छी चल रही है, तो उसके पास भी गैंगस्टर का फोन आ जाता है।”
उन्होंने दावा किया कि कई प्रतिष्ठित डॉक्टर और व्यापारी धमकियों के कारण अपने प्रतिष्ठानों तक जाने से डर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परिवार घरों में सिमटने को मजबूर हैं। प्रशासन पीड़ित के घर के बाहर पुलिसकर्मी तैनात कर देता है, लेकिन बदमाश फोन कर तंज कसते हैं—“क्या ये दो सिपाही तुम्हें बचा लेंगे?” भाटी ने सवाल उठाया कि पुलिस तैनाती की सूचना अपराधियों तक पहुंचती कैसे है? उनके अनुसार, स्थानीय नेटवर्क को ध्वस्त किए बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं।
‘डेथ वारंट’ का डर और संगठित गिरोहों की छाया
हाल के महीनों में नागौर, कुचामन, जोधपुर और बीकानेर समेत कई जिलों से व्यापारियों को धमकी भरे कॉल मिलने की खबरें सामने आई हैं। कई मामलों में कॉल करने वालों ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा गैंग से जुड़ा बताया। एक किराना व्यवसायी से कथित तौर पर महज पांच लाख रुपये की मांग की गई और न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
इन घटनाओं के बाद व्यापारिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि वे टैक्स भी दें और बदमाशों को हफ्ता भी—यह दोहरी मार अब बर्दाश्त नहीं।
नाबालिगों का इस्तेमाल, संपत्ति जब्ती की मांग
भाटी ने सदन में यह भी आरोप लगाया कि संगठित अपराधी नाबालिगों को ढाल बना रहे हैं। छोटी उम्र के लड़कों को पैसे और हथियारों का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेला जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन गिरोहों की संपत्तियों पर प्रहार नहीं किया गया और आर्थिक कमर नहीं तोड़ी गई, तो राजस्थान अपराध का नया गढ़ बन सकता है।
सरकार की अगली चाल पर नजर
विधानसभा में उठी इस बहस ने कानून-व्यवस्था पर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष जहां सरकार पर ढिलाई का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल सवाल यही है—क्या राजस्थान सख्त ‘मॉडल’ की राह पर चलेगा या पारंपरिक कानूनी ढांचे के भीतर रहकर ही समाधान खोजेगा? लेकिन इतना तय है कि रंगदारी और इंटरनेट कॉलिंग के बढ़ते साये ने प्रदेश की राजनीति और व्यापार जगत दोनों को बेचैन कर दिया है।
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