राजस्थान में फिर संत की संदिग्ध मौत; साध्वी प्रेम बाईसा के बाद महंत पारसनाथ का निधन
पश्चिमी राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा मामले के बाद एक बार फिर संत की रहस्यमयी मौत ने लोगों को हैरान कर दिया है। इस बार बाड़मेर जिले के ऐतिहासिक झाक मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है।

पश्चिमी राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा मामले के बाद एक बार फिर संत की रहस्यमयी मौत ने लोगों को हैरान कर दिया है। इस बार बाड़मेर जिले के ऐतिहासिक झाक मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। गुरुवार सुबह उनका शव मठ परिसर में बने पानी के टांके (कुंड) में तैरता हुआ मिला। 57 वर्षीय महंत की अचानक हुई मौत से मठ के सेवकों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में शोक और चिंता का माहौल है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह मठ के सेवक रोज की तरह पानी लेने के लिए टांके के पास पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कुंड के पानी में किसी व्यक्ति का शव तैर रहा है। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह झाक मठ के मठाधीश महंत पारसनाथ महाराज का शव है। यह दृश्य देखकर सेवक घबरा गए और तुरंत मठ के अन्य लोगों तथा गांव के लोगों को इसकी सूचना दी।
देखते ही देखते घटना की खबर पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मठ परिसर में पहुंच गए। इसके बाद महंत के शव को कुंड से बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
कुंड के पास मिली पादुका, बढ़ा संदेह
घटनास्थल की स्थिति को देखकर ग्रामीणों ने इस मौत को संदिग्ध बताया है। बताया जा रहा है कि कुंड के पास महंत की पादुका (चप्पल) व्यवस्थित तरीके से रखी हुई मिली है। यही वजह है कि स्थानीय लोग इस घटना को सामान्य हादसा मानने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटनास्थल की स्थिति देखकर यह कहना मुश्किल है कि यह केवल दुर्घटना है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है।
पुलिस एसपी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाड़मेर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा भी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मामले की गहन जांच के निर्देश दिए।
जांच के लिए एफएसएल और मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (एमओबी) की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया है, ताकि घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रारंभिक जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
मानसिक बीमारी का चल रहा था इलाज
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में मठ से जुड़े लोगों ने बताया कि महंत पारसनाथ पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज भी चल रहा था। हालांकि पुलिस इस जानकारी को भी जांच के दायरे में रखकर सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
पुलिस का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल मौत के कारणों को लेकर हर एंगल से जांच की जा रही है।
30 साल से झाक मठ के मठाधीश थे पारसनाथ
मिली जानकारी के अनुसार महंत पारसनाथ महाराज करीब तीन दशक से झाक मठ के मठाधीश थे। उन्होंने लंबे समय तक मठ की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं का संचालन किया। क्षेत्र में उन्हें धार्मिक गुरु के साथ-साथ समाजसेवी और सुधारक के रूप में भी सम्मानित माना जाता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार महंत पारसनाथ का स्वभाव सरल और मिलनसार था। वे अक्सर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। यही वजह है कि उनकी अचानक हुई मौत से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
झाक और आसपास के बाटाडू क्षेत्र में लोगों के बीच इस घटना को लेकर गहरी चिंता और दुख का माहौल है। पश्चिमी राजस्थान में संत की एक और संदिग्ध मौत सामने आने से लोगों में कई सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्यमयी मौत की असल वजह सामने आ सकेगी।
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