साध्वी प्रेम बाईसा की मौत पर सस्पेंस,शव गाड़ी में क्यों रखा रहा? पिता के खुलासों से गहराया शक
राजस्थान के जोधपुर में 29 जनवरी को हुई कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का मामला दिन-ब-दिन और पेचीदा होता जा रहा है। मौत के बाद सामने आए इंस्टाग्राम पोस्ट, पिता व गुरु वीरमनाथ के बदलते बयान और भक्तों के गंभीर आरोपों ने इस पूरे प्रकरण पर सवालों की परतें चढ़ा दी हैं।

राजस्थान के जोधपुर में 29 जनवरी को हुई कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का मामला दिन-ब-दिन और पेचीदा होता जा रहा है। मौत के बाद सामने आए इंस्टाग्राम पोस्ट, पिता व गुरु वीरमनाथ के बदलते बयान और भक्तों के गंभीर आरोपों ने इस पूरे प्रकरण पर सवालों की परतें चढ़ा दी हैं। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के आधार पर अगली कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
इंस्टाग्राम पोस्ट बना जांच का बड़ा आधार
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के लगभग चार घंटे बाद उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से एक भावुक पोस्ट साझा किया गया, जिसे ‘अंतिम संदेश’ या कथित सुसाइड नोट के तौर पर देखा गया। इस पोस्ट में सनातन धर्म, अग्नि परीक्षा और न्याय की बात लिखी गई थी। पोस्ट सामने आते ही यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और संदेह का कारण बन गया।
एनडीटीवी से बातचीत में साध्वी के पिता और गुरु वीरमनाथ ने स्वीकार किया कि यह पोस्ट उनके कहने पर डलवाया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह संदेश साध्वी ने पहले लिखा था और भक्तों के आग्रह पर इसे साझा किया गया। हालांकि, पोस्ट का समय और परिस्थितियां पुलिस और भक्तों—दोनों के लिए सवाल बन गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पोस्ट किस डिवाइस से, किसने और किस समय अपलोड किया।
शव को गाड़ी में रखने पर उठे सवाल
भक्तों का आरोप है कि साध्वी का शव निजी अस्पताल से आश्रम लाने के बाद लंबे समय तक गाड़ी में ही रखा गया। सामान्य तौर पर अंतिम संस्कार से पहले शव को सुरक्षित रखने के लिए बर्फ और अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। जब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाने की कोशिश की, तो पिता और समर्थकों ने इसका विरोध किया।
भक्तों का कहना है कि इसी दौरान आश्रम में लगे सीसीटीवी कैमरे भी हटा दिए गए, जिससे संदेह और गहरा गया। सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने के बाद पिता द्वारा यह कहना कि उनका मोबाइल फोन कोई ले गया, भक्तों को रास नहीं आया और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी।
इंजेक्शन के बाद मौत, कंपाउंडर जांच के घेरे में
पिता वीरमनाथ के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा कुछ दिनों से सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित थीं। इलाज के लिए आश्रम में एक कंपाउंडर को बुलाया गया, जिसने उन्हें इंजेक्शन लगाया। आरोप है कि इंजेक्शन लगने के महज पांच मिनट के भीतर ही साध्वी की हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने कंपाउंडर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसके पास से इंजेक्शन का खोल, इस्तेमाल की गई दवाइयां और अन्य मेडिकल सामग्री जब्त की गई है। प्रारंभिक पूछताछ के बाद फिलहाल उसे छोड़ दिया गया है, लेकिन उसकी भूमिका अब भी जांच के दायरे में है।
पोस्टमार्टम को लेकर भी हुआ विवाद
पुलिस जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाना चाहती थी, तब आश्रम समर्थकों ने विरोध किया। काफी मशक्कत और समझाइश के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। पुलिस का कहना है कि अब पूरी जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत प्राकृतिक थी, दवा की प्रतिक्रिया से हुई या इसके पीछे कोई और कारण है।
डिजिटल फॉरेंसिक और सीसीटीवी जांच
पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के निर्देश पर गठित जांच टीम इंस्टाग्राम पोस्ट की टाइमिंग, पोस्ट करने वाले डिवाइस, अकाउंट एक्सेस और वास्तविक लेखक की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है। इसके साथ ही आश्रम में लगे सीसीटीवी कैमरों को हटाने के कारण और समय की भी पड़ताल की जा रही है।
कई सवाल अब भी अनसुलझे
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने भक्तों और आम लोगों के बीच कई सवाल छोड़ दिए हैं—मौत के बाद पोस्ट क्यों किया गया, शव को गाड़ी में क्यों रखा गया, सीसीटीवी क्यों हटाए गए और इंजेक्शन में क्या था? पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। फिलहाल जांच जारी है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
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