कल पूरे राजस्थान में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत; हाईकोर्ट सहित सभी अदालतों में सुनवाई
साल 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को प्रदेशभर में आयोजित की जाएगी। इस दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ और जयपुर पीठ सहित राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों में एक साथ लोक अदालत का आयोजन होगा।

साल 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को प्रदेशभर में आयोजित की जाएगी। इस दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ और जयपुर पीठ सहित राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों में एक साथ लोक अदालत का आयोजन होगा। लोक अदालत के माध्यम से लंबे समय से लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी समझौते के जरिए निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा।
लोक अदालत का शुभारंभ शनिवार सुबह 10 बजे होगा। जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष उद्घाटन करेंगे, जबकि जयपुर पीठ में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी।
प्रदेशभर में 10.23 लाख से अधिक मामले सूचीबद्ध
राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए राजस्थान में इस बार बड़ी संख्या में मामलों को सूचीबद्ध किया गया है। राज्यभर की अदालतों में कुल करीब 10 लाख 23 हजार मामलों को लोक अदालत में सुनवाई के लिए चिन्हित किया गया है। इन मामलों में लंबित वादों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन से जुड़े विवाद भी शामिल हैं, जिनमें पक्षकारों के बीच समझाइश कर समझौते के आधार पर निस्तारण कराने की कोशिश की जाएगी।
इन मामलों के निपटारे के लिए राज्यभर में कुल 480 बेंच गठित की गई हैं। इन बेंचों में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य सदस्य मिलकर पक्षकारों के बीच मध्यस्थता कर विवादों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।
इन मामलों पर रहेगा विशेष फोकस
लोक अदालत में बैंक ऋण विवाद, बिजली-पानी बिल, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, पारिवारिक विवाद, आपसी समझौते योग्य आपराधिक प्रकरण, चेक अनादरण (एनआई एक्ट) से जुड़े मामले और विभिन्न विभागों से संबंधित वसूली प्रकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा कई ऐसे मामले भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें समझौते के आधार पर आसानी से निपटाया जा सकता है।
विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार लोक अदालत का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और पक्षकारों को त्वरित व सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। लोक अदालत में होने वाले समझौते को अदालत के आदेश की तरह ही कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और इसके खिलाफ सामान्यतः अपील भी नहीं की जाती।
पक्षकारों को मिलेगा त्वरित और सस्ता न्याय
अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में मामलों का निस्तारण होने से पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और खर्च से राहत मिलती है। यहां आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाए जाते हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो पाता है।
प्रदेशभर की अदालतों में आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत से बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण की उम्मीद जताई जा रही है। विधिक सेवा प्राधिकरण ने संबंधित पक्षकारों से अपील की है कि वे लोक अदालत में उपस्थित होकर समझौते के जरिए अपने मामलों का निपटारा कराएं और त्वरित न्याय का लाभ उठाएं।
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