घर से भागकर शादी भारतीय संस्कृति के खिलाफ; राजस्थान विधानसभा में बोले BJP MLA
राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल में मंगलवार को एक ऐसा मुद्दा गूंजा, जिसने सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह बहस छेड़ दी। आहोर से भाजपा विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई।

राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल में मंगलवार को एक ऐसा मुद्दा गूंजा, जिसने सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह बहस छेड़ दी। आहोर से भाजपा विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने युवाओं के घर से भागकर प्रेम विवाह करने और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि यह प्रवृत्ति न केवल पारिवारिक ढांचे को प्रभावित कर रही है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को भी ठेस पहुंचा रही है।
विधायक ने पर्ची के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज माता-पिता के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। युवक-युवतियां बिना परिवार की सहमति के घर छोड़कर शादी कर रहे हैं या लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी घटनाओं के चलते परिवारों में तनाव बढ़ रहा है और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
‘माता-पिता भी पढ़ाई छुड़वा देते हैं’
राजपुरोहित ने सदन में कहा कि कई मामलों में माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई तक छुड़वा देते हैं, ताकि वे घर से बाहर न जाएं। उनका दावा था कि भय और असुरक्षा के कारण अभिभावक कठोर कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में कम उम्र में भावनात्मक निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे कानूनी और सामाजिक जटिलताएं पैदा होती हैं।
विधायक के मुताबिक, कई बार ऐसे मामलों में जब परिजन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं और पुलिस युवती को बरामद करती है, तो वह थाने में अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती है। इससे परिवारों को गहरा मानसिक आघात पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पारिवारिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने उभरती नई चुनौती है।
18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के लिए प्रस्ताव
सदन में विधायक ने प्रस्ताव रखा कि 18 से 25 वर्ष की आयु के युवक-युवतियों के प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में माता-पिता की अनिवार्य सहमति से संबंधित कानून पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इस आयु वर्ग के कई युवा भावनात्मक निर्णय लेते हैं, जिनके दूरगामी परिणाम होते हैं। उन्होंने सरकार से व्यापक विमर्श कर ऐसा अधिनियम लाने की मांग की, जिससे अभिभावकों की भूमिका मजबूत हो और पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण हो सके।
सामाजिक बहस की आहट
राजस्थान जैसे पारंपरिक सामाजिक ढांचे वाले राज्य में यह मुद्दा नया नहीं है, लेकिन विधानसभा के पटल पर इस तरह से उठना इसे राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में ले आया है। राज्य के कई हिस्सों में पहले भी अंतर्जातीय और अंतरधार्मिक विवाह को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में विधायक का यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में सियासी और कानूनी विमर्श को तेज कर सकता है।
हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। एक पक्ष इसे पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन की रक्षा का प्रयास बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि यह विषय आने वाले समय में नीति-निर्माण और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनेगा।
राजस्थान की सियासत में नया विमर्श
राजस्थान विधानसभा में उठी यह बहस केवल प्रेम विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े प्रश्न को छूती है कि बदलते सामाजिक परिदृश्य में पारंपरिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। आहोर विधायक का प्रस्ताव अब सरकार के पाले में है, लेकिन सदन में उठी यह आवाज राज्य की राजनीति में एक नए विमर्श की शुरुआत जरूर कर गई है।
आने वाले दिनों में देखना होगा कि सरकार इस मांग पर किस तरह विचार करती है और क्या इस दिशा में कोई विधायी पहल होती है या यह मुद्दा केवल बहस तक सीमित रह जाता है। फिलहाल, राजस्थान की सियासत में ‘संस्कृति बनाम प्रेम’ की यह चर्चा सुर्खियों में है।
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