मुसलमान होने की वजह से कंबल नहीं दिया; कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी से की भाजपा नेता की शिकायत
राजस्थान की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई, जब टोंक के पूर्व सांसद और भाजपा नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया से जुड़ा एक वीडियो और आरोप सार्वजनिक हुआ। आरोप है कि एक निजी कार्यक्रम के दौरान

राजस्थान की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई, जब टोंक के पूर्व सांसद और भाजपा नेता सुखबीर सिंह जौनपुरिया से जुड़ा एक वीडियो और आरोप सार्वजनिक हुआ। आरोप है कि एक निजी कार्यक्रम के दौरान कंबल वितरण करते समय उन्होंने एक महिला से उसका नाम पूछने के बाद कथित रूप से यह कहते हुए कंबल वापस ले लिया कि जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का अधिकार नहीं है। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
निजी कार्यक्रम में कंबल वितरण के दौरान विवाद
बताया जा रहा है कि यह घटना निवाई क्षेत्र के ग्राम करेडा बुजुर्ग की है, जहां जौनपुरिया एक कार्यक्रम में कंबल बांट रहे थे। आरोप है कि एक महिला लाभार्थी से नाम पूछने के बाद पूर्व सांसद ने कंबल वापस ले लिया। इस कथित व्यवहार को लेकर विपक्ष ने इसे अमानवीय और भेदभावपूर्ण बताया है।
हालांकि जौनपुरिया ने इस पूरे प्रकरण पर सफाई देते हुए कहा है कि यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पूर्णतः निजी आयोजन था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
सांसद हरीश चन्द्र मीणा ने जताया कड़ा आक्रोश
विवाद बढ़ने के बाद सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हरीश चन्द्र मीणा ने इस घटना पर गहरी चिंता और कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सीधा आघात करार दिया। सांसद मीणा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों से समाज को जोड़ने और समरसता का संदेश देने की अपेक्षा की जाती है, न कि विभाजनकारी संकेत देने की।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को गंभीर बताते हुए सांसद मीणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पत्र में पूर्व सांसद के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, ताकि देश में स्पष्ट संदेश जाए कि धर्म, जाति या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चिंता
पत्र में सांसद मीणा ने लिखा है कि यदि प्रभावशाली और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग समाज को धर्म और विचारधारा के आधार पर बांटने का प्रयास करेंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तो इससे सामाजिक सौहार्द, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि रह चुके व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अत्यंत चिंताजनक है।
सांसद मीणा ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की पहचान विविधता में एकता और सामाजिक सद्भाव से है। ऐसे में किसी भी नागरिक के साथ राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव किया जाना देश की मूल आत्मा के विपरीत है।
केंद्र से त्वरित हस्तक्षेप की अपील
उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री से भी इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि निष्पक्ष जांच के बाद न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मीणा ने कहा कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे गलत संदेश जाएगा और सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इधर, भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम पर सबकी नजरें केंद्र सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और किसी भी आधिकारिक जांच की घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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