राजस्थान में वायुशक्ति युद्धाभ्यास का निरीक्षण करेंगी राष्ट्रपति मुर्मू, लड़ाकू हेलिकॉप्टर से भरेंगी पहली उड़ान
पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ 27 फरवरी को आयोजित होगा। इस हाई-प्रोफाइल सैन्य अभ्यास में सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू विशेष रूप से मौजूद रहेंगी।

पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ 27 फरवरी को आयोजित होगा। इस हाई-प्रोफाइल सैन्य अभ्यास में सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू विशेष रूप से मौजूद रहेंगी। वे 26 और 27 फरवरी को दो दिवसीय जैसलमेर दौरे पर हैं।
तय कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति 27 फरवरी को स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) HAL Prachand ‘प्रचंड’ में उड़ान भरेंगी और सीमावर्ती एयरस्पेस में युद्धाभ्यास क्षेत्र का हवाई मुआयना करेंगी। यह पहला अवसर होगा जब कोई राष्ट्रपति जैसलमेर की सीमा से सटे क्षेत्र में किसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरेगा।
शाम को राष्ट्रपति पोकरण रेंज पहुंचेंगी, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में ‘वायु शक्ति-2026’ की औपचारिक शुरुआत होगी। इसके बाद वे वायुसेना स्टेशन पर अधिकारियों और वायुसैनिकों से संवाद कर उनका हौसला बढ़ाएंगी।
आसमान से बरसेगी मारक क्षमता
इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना अपनी सटीक प्रहार क्षमता और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन करेगी। अभ्यास में Dassault Rafale, Sukhoi Su-30MKI और Boeing AH-64 Apache जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर हिस्सा लेंगे। इसके अलावा विशेष अभियान के लिए Lockheed Martin C-130J Super Hercules भी तैनात रहेंगे, जो ‘गरुड़ कमांडो’ को वॉर-जोन में उतारने की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
एयर मार्शल नागेश कपूर के मुताबिक, इस मेगा एक्सरसाइज के दौरान करीब 12 हजार किलो गोला-बारूद का उपयोग होगा। गोलाबारी और ऑपरेशन के लिए 77 फाइटर जेट और 43 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में विमानों की एक साथ उड़ान भारतीय वायुसेना की मल्टी-डोमेन ऑपरेशन क्षमता को दर्शाती है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ पर खास फोकस
‘वायु शक्ति-2026’ में स्वदेशी ताकत पर विशेष जोर रहेगा। HAL Tejas और LCH ‘प्रचंड’ के साथ-साथ लोइटरिंग म्यूनिशन (कामिकेज ड्रोन) का भी प्रदर्शन किया जाएगा। यह अभ्यास स्पष्ट संदेश देगा कि भारतीय वायुसेना अब नई तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के दम पर तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है।
राष्ट्रपति का फाइटर जेट से पुराना नाता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का वायुसेना के विमानों से विशेष जुड़ाव रहा है। 29 अक्टूबर 2025 को उन्होंने अंबाला स्थित ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वॉड्रन के राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रचा था। इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को उन्होंने तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30MKI में करीब 30 मिनट की उड़ान भरी थी। लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर 700 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भरते हुए उन्होंने वायुसेना की तैयारियों का जायजा लिया था। वे दो अलग-अलग फ्रंटलाइन फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बनीं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जैसलमेर में इस कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। चांधन से लेकर पोकरण तक पूरे इलाके को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है। 24 फरवरी को फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान आसमान में गूंजते फाइटर जेट्स और विस्फोटों ने इलाके को दहला दिया था।
दुनिया को जाएगा स्पष्ट संदेश
रणनीतिक दृष्टि से यह अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान सीमा के पास हो रहा यह प्रदर्शन दुनिया को यह संदेश देगा कि भारत अंधेरे में भी सटीक प्रहार करने में सक्षम है और कई मोर्चों पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।
‘वायु शक्ति-2026’ न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन होगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के रक्षा संकल्प का भी सशक्त प्रतीक बनेगा। सीमावर्ती रेगिस्तान की धरती पर जब आसमान से आग बरसेगी, तो यह भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता का स्पष्ट संकेत होगा।
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