राजस्थान में पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी, 4.02 करोड़ वोटर्स
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही ग्रामीण सरकारों के गठन की दिशा में औपचारिक तैयारियां तेज हो गई हैं। ताजा प्रकाशित सूची के अनुसार, राज्य में 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार 734 मतदाता पंचायत चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही ग्रामीण सरकारों के गठन की दिशा में औपचारिक तैयारियां तेज हो गई हैं। ताजा प्रकाशित सूची के अनुसार, राज्य में 4 करोड़ 2 लाख 20 हजार 734 मतदाता पंचायत चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। आयोग के मुताबिक अंतिम प्रकाशन तक 5 लाख 73 हजार 568 नए मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों में अगले महीने चुनाव कराए जाने की संभावना है। हालांकि 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी शेष है, लेकिन शेष इकाइयों में चुनावी प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।
प्रारूप सूची से अंतिम सूची तक
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि 29 जनवरी 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 3 करोड़ 96 लाख 47 हजार 166 मतदाता दर्ज थे। प्रारूप सूची पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के निस्तारण के बाद 13 लाख 66 हजार 435 मतदाताओं को जोड़ा गया, जबकि 7 लाख 92 हजार 867 नाम हटाए गए। अंतिम रूप से कुल मतदाता संख्या 4.02 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।
आयोग का कहना है कि सूची को पूरी पारदर्शिता के साथ अपडेट किया गया है ताकि पात्र मतदाताओं का नाम सुनिश्चित रूप से शामिल हो और अपात्र नाम हटाए जा सकें।
बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
जिलावार आंकड़ों में बांसवाड़ा सबसे आगे रहा है। यहां मतदाताओं में 4.55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। फलोदी जिले में 4.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके विपरीत टोंक जिले में महज 0.04 प्रतिशत और श्रीगंगानगर में 0.19 प्रतिशत की न्यूनतम बढ़ोतरी सामने आई है। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मतदाता वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक रही है।
जयपुर में 18 लाख से अधिक वोटर्स
राजधानी जयपुर में 22 पंचायत समितियों के अंतर्गत करीब 18.91 लाख मतदाता दर्ज किए गए हैं। इन पंचायत समितियों में 597 ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है। यहां चुनावी गतिविधियां सबसे अधिक सक्रिय रहने की संभावना है।
12 जिला परिषदों का कार्यकाल शेष
वर्तमान में 12 जिला परिषद और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 2026 तक शेष है।
5 सितंबर तक 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा।
29 अक्टूबर तक 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियों का कार्यकाल समाप्त होगा।
22 दिसंबर तक 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा।
इन तिथियों के अनुसार शेष इकाइयों में चुनाव चरणबद्ध तरीके से कराए जा सकते हैं।
ओबीसी आरक्षण पर संशय बरकरार
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग के आरक्षण को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करता, तब तक आरक्षण का अंतिम निर्धारण अधर में रहेगा। यदि रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो सरकार पुराने आरक्षण ढांचे के आधार पर चुनाव कराने का विकल्प चुन सकती है।
लोकतंत्र का ग्राम स्तर पर विस्तार
ग्रामीण स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती के लिए पंचायत चुनाव अहम माने जाते हैं। 4.02 करोड़ से अधिक मतदाताओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और संभावित प्रत्याशियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा दी है।
अब नजर चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा पर टिकी है। जैसे ही तारीखों का ऐलान होगा, प्रदेश में ग्राम सरकार के गठन की जंग पूरी तरह सियासी रंग में नजर आएगी।
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