सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, सजा तक लड़ाई,बीकानेर रेंज के आईजी ओमप्रकाश बोले– बरी होने से समाज खुद को ठगा महसूस करता है
अक्सर पुलिस आरोपी पकड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी उपलब्धि गिनाती है, लेकिन कुछ महीनों बाद वही आरोपी अदालत से बरी हो जाता है और पूरा समाज ठगा हुआ महसूस करता है। यह स्वीकारोक्ति खुद ओमप्रकाश ने की।

अक्सर पुलिस आरोपी पकड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी उपलब्धि गिनाती है, लेकिन कुछ महीनों बाद वही आरोपी अदालत से बरी हो जाता है और पूरा समाज ठगा हुआ महसूस करता है। यह स्वीकारोक्ति खुद ओमप्रकाश ने की। बीकानेर में मीडिया से बातचीत में आईजी ने साफ कहा कि अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सजा तक मुकदमे को मजबूती से ले जाना प्राथमिकता होगी।
आईजी ओमप्रकाश ने कहा, “हम देखते हैं कि आरोपी पकड़ लिया, प्रेस कॉन्फ्रेंस की और खुश हो गए। लेकिन बाद में जब चालान पेश करने के बाद आरोपी बरी हो जाता है तो समाज और परिवादी दोनों को लगता है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ।” उन्होंने माना कि जांच की गुणवत्ता और अदालत में पक्ष की मजबूती ही अंतिम परिणाम तय करती है।
नाबालिग दुष्कर्म-हत्या मामले में फांसी तक प्रयास
हाल ही में बीकानेर में नाबालिग लड़की के दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसे सजा दिलाने की दिशा में रणनीतिक तैयारी कर रही है। आईजी ने बताया कि इस केस में स्पेशल टीम गठित की गई है और विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) को शामिल कर जांच के अहम बिंदुओं की समीक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि चालान जल्द पेश किया जाएगा और अदालत में पक्ष इतना मजबूत रखा जाएगा कि महिला उत्पीड़न और POCSO Act के मामलों में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी दिलाई जा सके।
आईजी ने यह भी बताया कि इससे पहले अजमेर और पाली में भी इसी तरह के मामलों में लगातार फॉलोअप कर सख्त सजा सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं।
सरहद पार ड्रग्स और ‘पुराने प्लेयर्स’ की वापसी
सीमा पार से ड्रोन के जरिए आने वाली ड्रग्स को लेकर भी आईजी ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब वे सिक्योरिटी में डीआईजी थे, तब भी इस नेटवर्क पर काम किया था। एनडीपीएस मामलों में अक्सर नए अपराधी नहीं आते, बल्कि पुराने अपराधी ही बार-बार इस धंधे में सक्रिय होते हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2022-23 में पंजाब के ऐसे कई आरोपी दोबारा गिरफ्तार हुए, जिन पर पहले से 20 से अधिक एनडीपीएस के मुकदमे दर्ज थे। जमानत मिलने के बाद वे फिर उसी अवैध कारोबार में लौट आते हैं।
आईजी ने स्पष्ट किया कि इस चुनौती से निपटने के लिए अन्य राज्यों के साथ बेहतर समन्वय (कोर्डिनेशन) जरूरी है। ड्रग्स नेटवर्क अब अंतरराज्यीय रूप ले चुका है, इसलिए साझा रणनीति और इंटेलिजेंस शेयरिंग पर जोर दिया जाएगा।
हर साइबर केस साइबर थाने में नहीं
साइबर अपराधों को लेकर भी आईजी ने एक नई पहल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अभी आम धारणा यह है कि साइबर से जुड़ा कोई भी अपराध हो तो पीड़ित को सीधे साइबर थाने भेज दिया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर थाना 80 से 100 किलोमीटर दूर होता है।
“इतनी दूरी तय करते-करते पीड़ित को आर्थिक नुकसान काफी हो चुका होता है,” आईजी ने कहा।
उन्होंने बताया कि अब योजना है कि छोटे ग्रामीण थानों में भी 2-3 प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं, जो कॉल डिटेल निकाल सकें, डेटा एनालिसिस कर सकें और जरूरत पड़ने पर बैंक खाते तुरंत ब्लॉक करवा सकें। इससे शुरुआती स्तर पर ही साइबर फ्रॉड को रोका जा सकेगा।
आईजी के मुताबिक, हर मुकदमा साइबर थाने में दर्ज होना जरूरी नहीं है। यदि स्थानीय स्तर पर तकनीकी दक्षता विकसित की जाए तो पीड़ित को तत्काल राहत मिल सकती है।
‘गिरफ्तारी नहीं, परिणाम मायने रखते हैं’
आईजी ओमप्रकाश का पूरा बयान पुलिस व्यवस्था के लिए आत्ममंथन जैसा है। उन्होंने माना कि केवल गिरफ्तारी दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालत में दोष सिद्ध कर सजा सुनिश्चित करना ही असली सफलता है।
बीकानेर रेंज में अब जांच की गुणवत्ता, अभियोजन की मजबूती और राज्यों के बीच समन्वय पर विशेष फोकस रहेगा। महिला उत्पीड़न, पॉक्सो, ड्रग्स और साइबर अपराध—चारों मोर्चों पर पुलिस रणनीति को नए सिरे से गढ़ने की तैयारी में है।
पुलिस की यह नई सोच अगर जमीन पर उतरती है, तो न केवल अपराधियों के लिए सख्ती का संदेश होगा, बल्कि पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।
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