मिडिल ईस्ट युद्ध का असर रसोई तक: राजस्थान में LPG सिलेंडर के दाम बढ़े
मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के घरों की रसोई तक पहुंचने लगा है। तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपए और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 114 रुपए बढ़ा दिए हैं।

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के घरों की रसोई तक पहुंचने लगा है। तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपए और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 114 रुपए बढ़ा दिए हैं। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद राजस्थान में रसोई गैस के दाम फिर से आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगे हैं।
तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरों के मुताबिक अब जयपुर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 856.50 रुपए के बजाय 916.50 रुपए में मिलेगा। इसी तरह उदयपुर में 944.50 रुपए, बाड़मेर में 939 रुपए और जैसलमेर में घरेलू सिलेंडर करीब 939 रुपए में मिलेगा। वहीं कॉमर्शियल यानी 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत बढ़कर करीब 1911 रुपए तक पहुंच गई है।
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 11 महीनों में पहली बार घरेलू रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। हालांकि कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा असर होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
3 महीने में 300 रुपए तक महंगा हुआ कॉमर्शियल सिलेंडर
दरअसल, तेल कंपनियों ने 1 मार्च को ही कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 27.50 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद अब 114 रुपए की नई बढ़ोतरी कर दी गई है।
अगर जनवरी से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल की शुरुआत से लेकर मार्च तक कॉमर्शियल सिलेंडर करीब 302 रुपए तक महंगा हो चुका है। लगातार बढ़ती कीमतों से व्यापारियों और होटल व्यवसायियों में भी चिंता बढ़ने लगी है।
खाड़ी देशों में युद्ध का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक इस पूरी स्थिति की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है। खाड़ी देशों से दुनिया के कई देशों को कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर वहां युद्ध या तनाव बढ़ता है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है।
भारत भी अपनी बड़ी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा असर भारत में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।
सूत्रों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र से गैस और तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका के चलते भारत में एलपीजी का स्टॉक धीरे-धीरे कम होने लगा है। इसी वजह से तेल कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है।
गैस बुकिंग के नियम भी बदले
स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों ने गैस बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। पहले उपभोक्ता 25 दिन के भीतर अगला सिलेंडर बुक कर सकते थे, लेकिन अब बुकिंग का समय 25 से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया गया है।
यानी अगर किसी उपभोक्ता ने 1 तारीख को सिलेंडर बुक किया और 2 तारीख को उसे डिलीवरी मिल गई, तो वह अगली बुकिंग डिलीवरी की तारीख से कम से कम 25 दिन बाद ही कर पाएगा।
इस कदम का मकसद गैस की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखना बताया जा रहा है, ताकि सप्लाई पर दबाव कम किया जा सके।
सरकार ने भी संभाली कमान
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 5 मार्च को सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था।
सरकार ने निर्देश दिया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी यानी रसोई गैस बनाने में करेंगी। इससे घरेलू गैस की सप्लाई को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में बढ़ेगा असर
राजस्थान जैसे बड़े राज्य में जहां बड़ी आबादी घरेलू एलपीजी पर निर्भर है, वहां इस बढ़ोतरी का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। खासकर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट पर असर डालने वाली है।
उधर होटल, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि अगर कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो उन्हें खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
कुल मिलाकर खाड़ी देशों में चल रहा तनाव अब हजारों किलोमीटर दूर राजस्थान की रसोई तक अपना असर दिखाने लगा है। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
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