हमारा घर अवैध कैसे? सवाल के साथ हजारों परिवार लामबंद; जयपुर की 87 कॉलोनियों पर बुलडोजर का साया
राजधानी जयपुर में इन दिनों एक अजीब बेचैनी तैर रही है। शहर के सांगानेर इलाके की 87 कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या सच में हमारे घर अवैध हैं?

राजधानी जयपुर में इन दिनों एक अजीब बेचैनी तैर रही है। शहर के सांगानेर इलाके की 87 कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या सच में हमारे घर अवैध हैं?
जिन गलियों में पिछले चार–पांच दशकों से चूल्हे जलते रहे, जहां बच्चों की पीढ़ियां बड़ी हुईं, जहां लोगों ने अपनी जिंदगी की कमाई लगाकर ईंट–ईंट जोड़कर घर खड़े किए… आज उन्हीं घरों पर उजड़ने का डर मंडरा रहा है।
दरअसल, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड इन कॉलोनियों की जमीन को अवैध कब्जा मानते हुए भूमि अवाप्ति की कार्रवाई की तैयारी में बताया जा रहा है। जैसे ही यह खबर कॉलोनियों में फैली, माहौल अचानक बदल गया। रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे लोग अब अपने ही घरों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आने लगे।
40–50 साल की बसावट, अब ‘अवैध’ का सवाल
इन कॉलोनियों के लोगों का कहना है कि यह कोई नई बस्ती नहीं है। यहां कई घर 40 से 50 साल पुराने हैं। लोगों ने सहकारी समितियों से प्लॉट लेकर मकान बनाए, बैंकों से कर्ज लिया, धीरे-धीरे कॉलोनियां बसती चली गईं।
आज इन इलाकों में पक्की सड़कें हैं, बिजली के खंभे खड़े हैं, पानी की लाइनें बिछी हैं, नालियां बनी हैं और रात को स्ट्रीट लाइट भी जलती है। कई कॉलोनियां तो 80 से 100 प्रतिशत तक विकसित हो चुकी हैं।
ऐसे में लोगों का सवाल सीधा है अगर ये कॉलोनियां अवैध थीं, तो फिर इतने सालों तक प्रशासन और विभागों ने आंखें क्यों मूंदे रखीं?
रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत में टकराव
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जमीन की अवाप्ति को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में कई गंभीर त्रुटियां हैं। कागजों में जमीन को अवाप्त दिखा दिया गया, लेकिन मौके पर दशकों से बसी कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति पर ध्यान ही नहीं दिया गया।
लोग यह भी बताते हैं कि 1988 से अब तक आवासन मंडल इन जमीनों का भौतिक कब्जा भी नहीं ले पाया। ऐसे में अचानक कार्रवाई की तैयारी ने पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रेस क्लब से उठी आवाज
शुक्रवार को पिंक सिटी प्रेस क्लब में इस मुद्दे को लेकर प्रेस वार्ता हुई। नियमन हेतु संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाड़ा और महामंत्री परशुराम चौधरी ने कहा कि हजारों परिवारों के सिर से छत छीनने की तैयारी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उनका कहना है कि जिन जमीनों पर कॉलोनियां बसी हैं, उन्हें सहकारी समितियों ने किसानों से खरीदकर आवासीय भूखंडों में बदला था। लोगों ने पूरी प्रक्रिया के तहत प्लॉट लिए और घर बनाए। ऐसे में अब इन्हें अवैध बताना हजारों परिवारों के साथ अन्याय होगा।
अब सड़कों पर उतरने की तैयारी
इस पूरे विवाद के बीच कॉलोनियों में एक अलग ही हलचल है। लोग अपने घर बचाने के लिए एकजुट होते जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि 8 मार्च को बड़ा पैदल मार्च निकाला जाएगा।
यह मार्च श्योपुर चौराहे से पिंजरापोल गौशाला तक निकलेगा। आयोजकों का दावा है कि इसमें हजारों लोग शामिल होंगे महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे भी।
मांग साफ उजाड़ो नहीं, नियमित करो
प्रभावित परिवारों की मांग साफ है। उनका कहना है कि अगर कॉलोनियों में किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या है, तो उसे नियमितीकरण के जरिए हल किया जाए, न कि लोगों को बेघर करके।
लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इन घरों में लगा दी। अब अगर इन्हें उजाड़ा गया, तो हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे।
अब सबकी नजर 8 मार्च पर
फिलहाल जयपुर की इन 87 कॉलोनियों में हर घर में एक ही चर्चा है आखिर आगे क्या होगा?
क्या सरकार इन कॉलोनियों को नियमित करेगी, या फिर दशकों से बसे ये घर किसी बड़े प्रशासनिक फैसले की भेंट चढ़ जाएंगे?
इन सवालों के जवाब शायद 8 मार्च को सड़कों पर उतरने वाले हजारों कदम तय करेंगे।
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