5 लाख में सरकारी नौकरी का सौदा! डमी कैंडिडेट बनकर पास कराई भर्ती परीक्षा, 3 राज्यों से 5 गिरफ्तार
राजस्थान में सरकारी नौकरी का ‘रेट’ तय कर देने वाला बड़ा भर्ती घोटाला फिर सुर्खियों में है। सीनियर टीचर (सेकेंडरी एजुकेशन) ग्रेड-सेकेंड प्रतियोगी परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर अभ्यर्थियों को पास करवाने का संगठित खेल सामने आया है।

राजस्थान में सरकारी नौकरी का ‘रेट’ तय कर देने वाला बड़ा भर्ती घोटाला फिर सुर्खियों में है। सीनियर टीचर (सेकेंडरी एजुकेशन) ग्रेड-सेकेंड प्रतियोगी परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर अभ्यर्थियों को पास करवाने का संगठित खेल सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस रैकेट में खुद सरकारी शिक्षक और एमबीबीएस के स्टूडेंट शामिल थे, जो 3 से 5 लाख रुपए लेकर दूसरे की जगह परीक्षा देने पहुंच जाते थे।
राज्य की विशेष जांच एजेंसी Special Operations Group (एसओजी) ने सोमवार सुबह अंडमान, कोलकाता, जालोर, कोटा और जयपुर में एक साथ दबिश देकर 5 इनामी डमी कैंडिडेट को गिरफ्तार किया, जबकि एक संदिग्ध एमबीबीएस स्टूडेंट को डिटेन किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 26 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पेपर लीक के बाद भी नहीं रुका खेल
यह पूरा मामला Rajasthan Public Service Commission (आरपीएससी) द्वारा आयोजित वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) ग्रेड-सेकेंड प्रतियोगी परीक्षा-2022 से जुड़ा है। दिसंबर 2022 में सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान विषय की परीक्षा हुई थी। सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा निरस्त कर जनवरी 2023 में दोबारा करवाई गई।
लेकिन पेपर लीक के बाद भी ‘डमी कैंडिडेट’ गैंग सक्रिय रहा। शिकायत मिली कि कुछ अभ्यर्थी दूसरों को पैसे देकर अपनी जगह परीक्षा दिलवा रहे हैं और धोखाधड़ी से चयनित हो रहे हैं। एसओजी ने 2023 में 14 अभ्यर्थियों व अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।
फोटो से पहचान, सॉफ्टवेयर बना हथियार
एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ फोटोग्राफ के आधार पर डमी कैंडिडेट की पहचान करना था। आईजी शरत कविराज की निगरानी में वन-टाइम रजिस्ट्रेशन डेटाबेस की तर्ज पर विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया गया। इसमें अभ्यर्थियों के फोटो और विवरण अपलोड कर संदिग्ध तस्वीरों का मिलान किया गया।
तकनीकी जांच में 10-10 हजार रुपए के इनामी 6 आरोपी चिन्हित हुए। मोबाइल नंबर और एड्रेस ट्रेस कर लोकेशन निकाली गई और फिर एक साथ 6 जगहों पर दबिश दी गई।
सरकारी टीचर भी निकले ‘डमी’
गिरफ्तार सरकारी शिक्षक हनुमाना राम और निवास कुराडा ने 5-5 लाख रुपए लेकर फरार मूल अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दी थी।
हनुमाना राम ने बाड़मेर के धोरीमन्ना निवासी अशोक कुमार बिश्नोई की जगह परीक्षा दी।
निवास कुराडा ने जालोर के करावड़ी निवासी मनोहर सिंह बिश्नोई की जगह पेपर दिया।
दोनों मामलों में डील 5 लाख रुपए में तय हुई थी।
MBBS स्टूडेंट बने ‘सुपर सॉल्वर’
इस रैकेट में शामिल तीन एमबीबीएस फोर्थ ईयर स्टूडेंट भी गिरफ्तार किए गए हैं—महेश कुमार बिश्नोई (जयपुर), महिपाल बिश्नोई (कोटा) और सहीराम (पोर्ट ब्लेयर, अंडमान)।
महेश ने 3 लाख लेकर जालोर निवासी दिनेश कुमार गोदारा की जगह परीक्षा दी।
महिपाल ने 5 लाख में बरनाला (गंगापुर सिटी) निवासी सुरतराम मीणा की जगह एग्जाम दिया।
सहीराम ने 3 लाख लेकर सांचौर (जालोर) निवासी दिनेश कुमार की जगह परीक्षा दी।
इसके अलावा कोलकाता में पढ़ रहा संदिग्ध एमबीबीएस स्टूडेंट प्रिंस भी इसी नेटवर्क से जुड़ा मिला, जिसे पकड़कर जयपुर लाया जा रहा है।
अब तक 26 गिरफ्तार, नेटवर्क बड़ा होने की आशंका
एसओजी अब तक 12 मूल अभ्यर्थी, 9 डमी परीक्षार्थी और 5 बिचौलियों सहित कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं हो सकता। अन्य भर्तियों में भी इसी तरह का पैटर्न खंगाला जा रहा है।
राजस्थान की साख पर सवाल
भर्ती परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक और डमी कैंडिडेट प्रकरण ने राजस्थान की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों युवा जहां मेहनत से तैयारी करते हैं, वहीं ‘पैसे के दम पर नौकरी’ की मानसिकता सिस्टम को खोखला कर रही है।
एसओजी अब फरार मूल अभ्यर्थियों और बिचौलियों की तलाश में दबिश दे रही है। एजेंसी का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों और बैंक ट्रांजेक्शन की कड़ी जोड़कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।
राजस्थान में सरकारी नौकरी की होड़ के बीच यह मामला एक बार फिर साबित कर रहा है—यह सिर्फ परीक्षा नहीं, करोड़ों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। और इस लड़ाई में ‘डमी’ बनने वालों पर अब शिकंजा कस चुका है।
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