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राजस्थान के ताज होटल में ACB की दबिश,PHED का चीफ इंजीनियर गिरफ्तार, 9 अफसर हिरासत में

राजस्थान में 900 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ा एक्शन लेते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के फाइव स्टार होटल ताज अरावली से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 9 अफसरों को पकड़ा गया है

Tue, 17 Feb 2026 09:35 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में 900 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ा एक्शन लेते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के फाइव स्टार होटल ताज अरावली से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 9 अफसरों को पकड़ा गया है, जिनमें 3 रिटायर्ड अधिकारी और एक निलंबित अधिकारी शामिल हैं।

इधर, पीएचईडी जोधपुर में पोस्टेड एक्सईएन विशाल सक्सेना को सुबह करीब 5 बजे बाड़मेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया। एसीबी टीम दोनों अधिकारियों को लेकर जयपुर रवाना हो गई।

कई राज्यों में एक साथ छापेमारी

ACB की टीमों ने राजस्थान सहित बिहार, झारखंड और दिल्ली में एक साथ दबिश दी। जल जीवन मिशन घोटाले में रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन जारी है। एसीबी सूत्रों के अनुसार जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर सहित कुल 15 स्थानों पर कार्रवाई की गई।

रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी

सूत्रों के मुताबिक, एक्सईएन विशाल सक्सेना विरात्रा माता मंदिर में दर्शन के लिए ट्रेन से बाड़मेर पहुंचे थे। एसीबी टीम को पहले से उनकी मूवमेंट की सूचना थी। जैसे ही वे रेलवे स्टेशन पर उतरे, टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया और जयपुर ले जाया गया।

ये अधिकारी गिरफ्तार

एसीबी ने जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया, उनमें चीफ इंजीनियर केडी गुप्ता, तत्कालीन मुख्य अभियंता (परियोजना) दिनेश गोयल, रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर डीके गौड, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार (हाल चीफ इंजीनियर चूरू), वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांशु दीक्षित, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी और निलंबित एक्सईएन विशाल सक्सेना शामिल हैं।

जांच में सामने आया बड़ा खेल

एसीबी ने वर्ष 2024 में इस मामले में केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि मैसर्स श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर महेश मित्तल) और मैसर्स श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर पदमचंद जैन) ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर PHED अधिकारियों से मिलीभगत की।

आरोप है कि 960 करोड़ रुपए के टेंडर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए और करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ।

55 करोड़ का फर्जी भुगतान

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों फर्मों को बिना काम किए करीब 55 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। इस मामले में 139 इंजीनियर जांच के दायरे में हैं, जिनमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि पिछली सरकार के दौरान टेंडर शर्तों में बदलाव कर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ देने की कोशिश की गई। साइट इंस्पेक्शन जैसी विशेष शर्त लगाकर यह जानकारी लीक की गई कि कौन-कौन सी फर्में टेंडर में भाग ले रही हैं, जिससे पारदर्शिता भंग हुई। हालांकि बाद में वित्त विभाग ने इन टेंडर्स को रद्द कर दिया था।

SIT कर रही चार अहम मामलों की जांच

ACB द्वारा गठित एसआईटी 20 हजार करोड़ रुपए के विशेष प्रोजेक्ट से जुड़े चार प्रमुख मामलों की जांच कर रही है। विशेष रूप से इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर टेंडर जारी करने की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि जांच में सामने आया है कि एक्सईएन विशाल सक्सेना ने केरल जाकर झूठी जांच रिपोर्ट पेश की थी। अब एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर में किन-किन इंजीनियर्स की भूमिका रही।

आगे क्या?

एसीबी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं ने प्रदेश की सियासत भी गरमा दी है।

फिलहाल एसीबी की कार्रवाई से PHED महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और पूरे घोटाले की परतें खुलने का इंतजार है।

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