राजस्थान कांग्रेस चीफ गोविंद सिंह डोटासरा अपने हमशक्ल से मिले; पहली ही मुलाकात में दे डाला चुनाव लड़ने का ऑफर
राजस्थान की सियासत में पिछले चार दिनों से एक अनोखी चर्चा जोरों पर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हमशक्ल को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस आखिरकार विधानसभा तक पहुंच गई। सोमवार को डोटासरा ने अपने हमशक्ल नरेश सिंधी को विधानसभा में बुलाकर मुलाकात की।

राजस्थान की सियासत में पिछले चार दिनों से एक अनोखी चर्चा जोरों पर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हमशक्ल को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस आखिरकार विधानसभा तक पहुंच गई। सोमवार को डोटासरा ने अपने हमशक्ल नरेश सिंधी को विधानसभा में बुलाकर मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच हल्का-फुल्का, आत्मीय और मजाकिया माहौल देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
दरअसल, कुछ दिन पहले एक शादी समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति नाश्ता करते हुए नजर आया। पहली नजर में लोग उसे गोविंद सिंह डोटासरा समझ बैठे। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर यह शख्स कौन है। बाद में स्पष्ट हुआ कि वह डोटासरा नहीं, बल्कि उनके हमशक्ल नरेश सिंधी हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा जब डोटासरा तक पहुंची तो उन्होंने भी इसे सकारात्मक अंदाज में लिया और नरेश सिंधी को मिलने के लिए आमंत्रित कर लिया। सोमवार को विधानसभा परिसर में दोनों की आमने-सामने मुलाकात हुई। यहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जब दोनों को साथ देखा तो कुछ पल के लिए वे भी हैरान रह गए। नरेश सिंधी की शक्ल-सूरत, कद-काठी और हेयरस्टाइल तक डोटासरा से काफी मिलती-जुलती है।
मुलाकात के दौरान डोटासरा ने मुस्कुराते हुए नरेश को अपना ‘धर्म भाई’ घोषित कर दिया। उनके इस बयान पर वहां मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंज उठे। डोटासरा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब उन्होंने नरेश को अपना भाई बना लिया है। इस दौरान दोनों के बीच आत्मीय बातचीत होती रही और माहौल पूरी तरह सहज बना रहा।
हंसी-मजाक के बीच राजनीतिक तड़का भी देखने को मिला। डोटासरा ने चुटकी लेते हुए कहा कि आगामी पंचायत और निकाय चुनाव में जहां वे स्वयं प्रचार के लिए नहीं पहुंच पाएंगे, वहां नरेश सिंधी को भेजा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में कोशिश करूंगा कि नरेश को किसी सीट से चुनाव भी लड़वा दूं। हालांकि उन्होंने यह बात पूरी तरह हंसी-मजाक के अंदाज में कही, लेकिन उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दे दी है।
डोटासरा ने यह भी कहा कि अगर नरेश चुनाव लड़ेंगे तो वे भी उनकी तरह फटकार लगाने में पीछे नहीं रहेंगे। इस पर नरेश सिंधी ने भी डोटासरा की शैली की नकल करते हुए गमछा लहराया, जिसे देखकर आसपास खड़े लोग मुस्कुरा उठे। दोनों के बीच की यह केमिस्ट्री सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात ने जहां एक ओर सियासत में हल्का-फुल्का माहौल बनाया है, वहीं यह नेताओं के मानवीय और सहज पक्ष को भी सामने लाती है। अक्सर तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच ऐसी घटनाएं राजनीतिक वातावरण को कुछ देर के लिए हल्का कर देती हैं।
विधानसभा परिसर में हुई इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर उत्साह देखा गया, जबकि विपक्षी खेमे में भी इसे दिलचस्प घटनाक्रम के रूप में लिया जा रहा है।
फिलहाल यह पूरी घटना मजाक और आत्मीयता तक सीमित है, लेकिन जिस तरह डोटासरा ने चुनाव लड़वाने तक की बात कही, उससे यह स्पष्ट है कि उन्होंने इस वायरल चर्चा को सकारात्मक रूप से भुनाने का प्रयास किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह हमशक्ल चर्चा यहीं थमती है या फिर चुनावी मौसम में कोई नया मोड़ लेती है।
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