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सिर के ऊपर से गुजरती मिसाइलें, रातभर धमाके… दुबई से राजस्थान लौटे युवकों की आपबीती

मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में भी डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस तनाव की गूंज दुबई जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर तक सुनाई दी, जहां बीकानेर के छह युवक अचानक युद्ध जैसे हालात में फंस गए। 

Thu, 5 March 2026 10:25 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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सिर के ऊपर से गुजरती मिसाइलें, रातभर धमाके… दुबई से राजस्थान लौटे युवकों की आपबीती

मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों में भी डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस तनाव की गूंज दुबई जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर तक सुनाई दी, जहां बीकानेर के छह युवक अचानक युद्ध जैसे हालात में फंस गए। कई दिनों तक दहशत के माहौल में रहने के बाद आखिरकार ये सभी युवक सुरक्षित भारत लौट आए।

जब ये युवक अपने घर बीकानेर पहुंचे और उन्होंने वहां बिताए दिनों का अनुभव सुनाया, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। युवाओं का कहना है कि दुबई में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि कई रातें उन्होंने डर और अनिश्चितता के बीच गुजारीं। आसमान में तेज रफ्तार से गुजरती मिसाइलें और दूर-दूर तक सुनाई देते धमाकों की आवाजें उन्हें लगातार भयभीत करती रहीं।

आंखों के सामने से गुजरती मिसाइलें

बीकानेर लौटे युवकों ने बताया कि कई बार उन्हें अपनी आंखों के सामने आसमान में मिसाइलें गुजरती हुई दिखाई देती थीं। कभी ऐसा लगता था कि मिसाइल बहुत दूर गिरी है, तो कभी ऐसा लगता था जैसे वह सिर के ऊपर से ही गुजर गई हो।

लगातार सुनाई देती धमाकों की आवाजों ने माहौल को पूरी तरह दहशत में बदल दिया था। रात में नींद आना मुश्किल हो गया था और हर समय यही डर बना रहता था कि कहीं हालात और ज्यादा खराब न हो जाएं।

युवाओं के मुताबिक, “जब भी आसमान में तेज आवाज होती या रोशनी दिखती, तो दिल की धड़कन तेज हो जाती थी। हमें लगने लगता था कि कहीं कोई बड़ा हमला तो नहीं हो गया।

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अलग-अलग काम से गए थे दुबई

दुबई में फंसे इन युवाओं में रवि पुगलिया अपने गुरुजी से मिलने और घूमने के लिए गया हुआ था। वहीं अंशुल वहां एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में नौकरी कर रहा था। बाकी युवक भी अलग-अलग कंपनियों में काम करते थे।

इनमें से एक युवक राजा दुबई में ट्रैवल कंपनी चलाता था। लेकिन जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, सभी ने अपने काम और योजनाएं छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। युवाओं का कहना है कि उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता अपनी जान बचाना और सुरक्षित घर लौटना था।

दुबई एयरपोर्ट बंद होने से बढ़ी मुश्किल

जानकारी के अनुसार, ईरान की ओर से क्षेत्र में बैलेस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया था। इसी दौरान दुबई एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे वहां फंसे लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

प्रशासन की ओर से लोगों को जहां हैं वहीं रहने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में इन युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित तरीके से दुबई से बाहर निकलने की थी।

दुबई से ओमान और फिर भारत की राह

हालात बिगड़ते देख बीकानेर के इन युवकों ने दुबई छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने पहले दुबई से निकलकर ओमान का रास्ता पकड़ा और वहां मस्कट पहुंचे।

मस्कट पहुंचने के बाद भी उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। वहां उन्हें भारत आने वाली फ्लाइट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। कई घंटों की जद्दोजहद और अनिश्चितता के बाद आखिरकार उन्हें भारत के लिए फ्लाइट मिल सकी।

लंबी यात्रा और तनाव भरे सफर के बाद जब ये सभी युवक सुरक्षित बीकानेर पहुंचे, तो उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। कई दिनों की चिंता और बेचैनी के बाद अपने बच्चों को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखें भी नम हो गईं।

जोधपुर के 120 श्रद्धालु भी लौटे

इसी बीच राजस्थान के जोधपुर से जुड़े करीब 120 लोग भी दुबई से वापस लौट आए हैं। ये सभी लोग सत्संग यात्रा और धार्मिक कार्यक्रम के लिए दुबई गए थे।

जोधपुर के सूरसागर स्थित बड़ा रामद्वारा से जुड़े संत अमृत राम महाराज और मनोहर दास महाराज के साथ श्रद्धालुओं का यह दल 23 फरवरी को दुबई पहुंचा था। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें 28 फरवरी तक वापस लौटना था, लेकिन इसी बीच ईरान और इजरायल के बीच तनाव अचानक बढ़ गया और सभी वहीं फंस गए।

हालांकि बाद में स्थिति थोड़ी सामान्य होने पर सभी श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए।

खाड़ी देशों में पसरा डर

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। दुबई जैसे शहरों में भी लोगों के बीच डर का माहौल देखा गया।

बीकानेर के युवकों के लिए यह अनुभव जिंदगी भर याद रहने वाला बन गया है। मिसाइलों की गूंज, धमाकों की आवाज और हर पल बना रहने वाला डर—ये सब पल शायद वे कभी नहीं भूल पाएंगे।

हालांकि अब सभी युवक सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं, लेकिन उनके अनुभव ने यह जरूर दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव की आंच दूर बैठे आम लोगों तक भी पहुंच सकती है।

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