फोटो बदली, ब्लूटूथ लगाया और पास करवा दी परीक्षा; राजस्थान SOG ने हरियाणा से दबोचा डमी कैंडिडेट
राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं में शामिल सहायक अभियंता (सिविल) भर्ती में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले 25 हजार रुपए के इनामी आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने गिरफ्तार कर लिया है।

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं में शामिल सहायक अभियंता (सिविल) भर्ती में डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा देने वाले 25 हजार रुपए के इनामी आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी न केवल दूसरों की जगह परीक्षा देता था, बल्कि ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए बाहर से जवाब लेकर पेपर हल करने का भी जुगाड़ करता था।
एसओजी की जांच में सामने आया है कि महज 12वीं पास गुरदीप दास नाम का युवक एक संगठित तरीके से डमी परीक्षार्थी बनकर भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करता था। हैरानी की बात यह है कि जिस परीक्षा में वह बैठा, वह राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सहायक अभियंता (सिविल) जैसी तकनीकी परीक्षा थी।
25 हजार का इनामी था आरोपी
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी गुरदीप दास लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। एसओजी की टीम ने उसे हरियाणा से डिटेन कर गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने 21 मई 2023 को आयोजित राजस्थान लोक सेवा आयोग की सहायक अभियंता (सिविल) परीक्षा में असली अभ्यर्थी इंद्राज सिंह की जगह बैठकर परीक्षा दी थी।
इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए प्रवेश पत्र में फोटो बदलकर डमी कैंडिडेट को परीक्षा केंद्र में बैठाया गया था। पूरे मामले में पहले ही इंद्राज सिंह सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गुरदीप दास फरार था।
कैसे चलता था डमी कैंडिडेट का खेल
एसओजी की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि आरोपी गुरदीप दास एक नेटवर्क के जरिए ऐसे अभ्यर्थियों से संपर्क करता था, जिन्हें किसी भी कीमत पर सरकारी नौकरी चाहिए होती थी। इसके बाद मोटी रकम लेकर वह उनके स्थान पर परीक्षा देने की जिम्मेदारी लेता था।
सबसे पहले असली अभ्यर्थी का प्रवेश पत्र और पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल किए जाते थे। इसके बाद फोटो एडिटिंग या अन्य तकनीकों के जरिए एडमिट कार्ड में फोटो बदल दी जाती थी। परीक्षा के दिन गुरदीप दास असली अभ्यर्थी बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचता और पेपर हल करता था।
कई मामलों में यह भी सामने आया है कि आरोपी परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल करता था। परीक्षा हॉल में कान के अंदर छिपे छोटे डिवाइस के जरिए बाहर बैठे लोग सवालों के जवाब बताते थे और आरोपी उन्हें लिख देता था।
ब्लूटूथ से बाहर से मिलते थे जवाब
एसओजी अधिकारियों के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए बाहरी सहायता लेकर नकल करता था। इस पूरे सिस्टम में बाहर बैठे कुछ लोग सवालों को हल कर जवाब भेजते थे।
इस तरह परीक्षा हॉल के अंदर बैठे डमी कैंडिडेट को तुरंत सही जवाब मिल जाते थे। इसी तकनीक के जरिए आरोपी ने सहायक अभियंता जैसी कठिन परीक्षा भी पास करवा दी।
हरियाणा-राजस्थान में 7 केस दर्ज
जांच में यह भी सामने आया है कि गुरदीप दास का यह पहला मामला नहीं है। उसके खिलाफ हरियाणा और राजस्थान में कुल सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें कई मामले डमी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा देने से जुड़े हुए हैं।
एसओजी के अनुसार आरोपी पहले भी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इसी तरह के फर्जीवाड़े में शामिल रहा है। यही कारण है कि एजेंसियां अब इस मामले को बड़े नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही हैं।
पेपर लीक एंगल से भी जांच
एसओजी अब इस पूरे मामले की जांच पेपर लीक एंगल से भी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि डमी कैंडिडेट इतनी आसानी से परीक्षा पास करवा रहा था तो इसके पीछे किसी बड़े गिरोह या तकनीकी नेटवर्क की भी भूमिका हो सकती है।
अब तक इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसओजी की टीमें ब्लूटूथ नेटवर्क और पेपर लीक से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं।
राजस्थान में लगातार सामने आ रहे भर्ती परीक्षा घोटालों के बीच यह मामला एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर कैसे संगठित गिरोह तकनीक और फर्जी पहचान के सहारे सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
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