21 deaths in police custody in two years, Rajasthan government told the assembly 2 साल में पुलिस हिरासत में 21 मौत, विधानसभा में बोली राजस्थान सरकार, Rajasthan Hindi News - Hindustan
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2 साल में पुलिस हिरासत में 21 मौत, विधानसभा में बोली राजस्थान सरकार

विधायक शांति धारीवाल के एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने कहा कि दो साल की अवधि में हिरासत में 21 मौतें दर्ज की गईं। सरकार ने इन मामलों में की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी।

Tue, 24 Feb 2026 04:14 PMRatan Gupta भाषा, जयपुर
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2 साल में पुलिस हिरासत में 21 मौत, विधानसभा में बोली राजस्थान सरकार

राजस्थान सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि एक जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच राज्य में पुलिस हिरासत में मौत के 21 मामले सामने आए हैं।विधायक शांति धारीवाल के एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने कहा कि दो साल की अवधि में हिरासत में 21 मौतें दर्ज की गईं। सरकार ने इन मामलों में की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी।

2024 में 8 और 2025 में 13 मौतें

ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई संबंधी सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि पुलिस हिरासत में मृत्यु के सभी मामलों में सरकार द्वारा न्यायिक एवं प्रशासनिक जांच की कार्रवाई की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में पुलिस हिरासत में आठ मौतें दर्ज की गईं जबकि साल 2025 में ऐसी 13 मौतें हुईं। सरकार ने सदन को बताया कि 2025 में हुए नौ मामलों में जांच लंबित है।

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सरकार- पुलिस कर्मियों की लापरवाही नहीं

सरकार ने कहा कि जिन मामलों में न्यायिक जांच पूरी हो गई उनमें पुलिस कर्मचारियों की कोई लापरवाही नहीं पाई गई। एक मामला इसका अपवाद है जिसमें विभागीय जांच की सिफारिश की गई। सरकार ने कहा कि अन्य मामलों में सभी मौतें प्राकृतिक कारणों से या आत्महत्या के कारण हुईं।

न्यायिक हिरासत में मौत, क्या है मामला

न्यायिक हिरासत में मौत (Judicial Custody Death) वह स्थिति है जब कोई आरोपी पुलिस रिमांड के बजाय अदालत के आदेश पर जेल में बंद हो और उसकी हिरासत के दौरान मृत्यु हो जाए। इसके पीछे बीमारी, आत्महत्या, कैदियों के बीच हिंसा, लापरवाही, भीड़भाड़, या पर्याप्त चिकित्सा सुविधा का अभाव जैसी वजहें हो सकती हैं।

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समाधान के लिए नियमित मेडिकल जांच, सीसीटीवी निगरानी, भीड़ कम करना और जवाबदेही तय करना जरूरी है। कानूनन हर हिरासत मौत की मजिस्ट्रियल जांच अनिवार्य है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 24 घंटे में सूचना देना होती है और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई संभव है।

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