AAP सांसद अशोक मित्तल पर ED का छापा, राघव चड्ढा की जगह बने हैं राज्यसभा के उपनेता
पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर ईडी की रेड हुई है। वह उच्च सदन में पार्टी के उपनेता भी हैं। उन्हें हाल ही में राघव चड्ढा के स्थान पर यह जिम्मेदारी मिली थी। अशोक मित्तल की पहचान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक के तौर पर रही है।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर पर ईडी की रेड हुई है। वह उच्च सदन में पार्टी के उपनेता भी हैं। उन्हें हाल ही में राघव चड्ढा के स्थान पर यह जिम्मेदारी मिली थी। अशोक मित्तल की पहचान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक के तौर पर रही है। इस रेड को भगवंत मान ने भाजपा की ओर से चुनावी तैयारी बताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'भाजपा द्वारा पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू... आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी में ED की रेड। यह मोदी का स्टाइल है। लेकिन हम भो पत्ते नहीं, जो शाख से टूट कर गिर जाएंगे।'
भगवंत मान की पोस्ट को ही रीशेयर करते हुए अरविंद केजरीवाल ने लिखा, 'मोदी जी ने पंजाब में चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन पंजाब के लोग ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। बीजेपी को इसका करारा जवाब देंगे।' ईडी के सूत्रों का कहना है अशोक मित्तल के कारोबार से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है। ये रेड फेमा की जांच के तहत की गई हैं। लवली प्रोफेशल यूनिवर्सिटी के मालिक अशोक मित्तल को हाल ही में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी ने उपनेता बनाया है। उन्हें राघव चड्ढा के स्थान पर मौका मिला है। अधिकारियों का कहना है कि मित्तल के जालंधर और फगवाड़ा स्थित ठिकानों पर रेड मारी गई हैं। इसके अलावा भी कुछ स्थानों पर छापेमारी की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की जा रही है। अशोक मित्तल को 2022 में राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी ने मनोनीत किया था। वह निर्विरोध ही चुने गए थे। फिलहाल वह वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। वह भले ही राज्यसभा के सांसद 4 सालों से हैं, लेकिन वह ज्यादा चर्चा में तब आए, जब उन्हें राघव चड्ढा के स्थान पर उपनेता बनाया गया।
राघव चड्ढा और AAP के रिश्ते कैसे होते गए कमजोर
बता दें कि राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के रिश्ते बीते कई सालों से कमजोर दिख रहे थे। यहां तक कि अरविंद केजरीवाल के जेल जाने और फिर बाहर आने तक पर राघव चड्ढा ने कोई टिप्पणी नहीं की थी। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के एजेंडे से अलग वह व्यक्तिगत तौर पर भी कई सवाल उठाते थे। इसी के चलते लंबे समय से कयास लग रहे थे कि आखिर राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के रिश्ते कैसे हैं। फिर जब राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया गया तो ये मतभेद सतह पर आ गए। यही नहीं राघव चड्ढा के संसद में बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।
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