यमुना में क्यों सफेद झाग? दिल्ली में पलूशन फैलाने वाली इकाइयों पर ऐक्शन के आदेश
दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने आईआईटी विशेषज्ञों के साथ कालिंदी कुंज का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि ओखला बैराज की ढलान और जल प्रवाह की संरचना के कारण यमुना में झाग बनता है। सरकार अब प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई करेगी।

राष्ट्रीय राजधानी के कालिंदी कुंज में यमुना में झाग बनने की स्थिति को समझने के लिए बुधवार को दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने यमुना घाट क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण किया। आईआईटी दिल्ली के पर्यावरण विशेषज्ञों, डीपीसीसी और जल बोर्ड के अफसरों के साथ किए गए निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि झाग बनने की यह स्थिति बैराज की संरचनात्मक परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होती है।
एक क्षेत्र तक ही सीमित है स्थिति
निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि झाग बनने की यह स्थिति एक क्षेत्र तक ही सीमित है और इसका मुख्य कारण ओखला बैराज की संरचना एवं जल प्रवाह की स्थिति है। बैराज पर ढलान होने के कारण पानी तेजी से गिरता है, जिससे उत्पन्न हलचल पानी में मौजूद अशुद्धियों को झाग के रूप में सतह पर ले आती है।
बैराज की तकनीकी परिस्थितियां भी जिम्मेदार
इस दौरान प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यह झाग एक विशेष स्थान पर बनने वाली स्थिति है और बैराज की तकनीकी परिस्थितियों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार के प्रयास लगातार जारी हैं और इस दिशा में काम तेज किया जाएगा।
घरों, धोबी घाटों से निकलने वाला डिटर्जेंट बढ़ाता है झाग
अधिकारियों ने बताया कि बैराज पर बनने वाली परिस्थितियों के साथ-साथ घरेलू डिटर्जेंट से आने वाले सर्फेक्टेंट्स भी झाग बनने में योगदान देते हैं। इसके अलावा, अवैध डाईंग यूनिट्स, लॉन्ड्री क्लस्टर्स और धोबी घाटों से निकलने वाला अपशिष्ट, कुछ नालों के माध्यम से आने वाला आंशिक रूप से साफ या अशोधित पानी भी इसके प्रभाव को बढ़ाता है। जल प्रवाह कम होने की स्थिति में यह असर अधिक दिखाई देता है।
यमुना को प्रदूषित करने वाली ईकाइयों पर कार्रवाई होगी
कैबिनेट मंत्री ने डीपीसीसी को आदेश दिया कि ऐसे सभी स्रोतों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए, जो प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। प्रदूषण कम करना प्राथमिकता होगी और किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
काम में तेजी लाने के निर्देश
सिंचाई मंत्री ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) के कामकाज और उन्हें अपग्रेड किए जाने की समीक्षा। उन्होंने अधिकारियों को इन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। वहीं, अधिकारियों ने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर लगभग 1500 एमजीडी तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।




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