यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 सालों में टोल टैक्स के रेट 41% बढ़े, सुविधाएं अब भी नाकाफी
Yamuna Expressway News : यमुना एक्सप्रेसवे को जेपी इंफ्राटेक ने 9 अगस्त 2012 में करीब 12 हजार करोड़ की लागत से तैयार किया था। इन बीते 13 सालों में टोल दरों में करीब छह बार बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिससे साढ़े चार हजार करोड़ से अधिक टोल वसूला जा चुका है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर लगातार महंगा होता जा रहा है। इसके बावजूद यहां सुविधाएं नाकाफी हैं। हादसों के ग्राफ में भी कोई कमी नहीं आ रही। इस 165 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की टोल दरें पिछले 13 सालों में 41 फीसदी तक बढ़ गईं। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के दावे जमीनी स्तर पर कमजोर नजर आते हैं।
जेपी इंफ्राटेक ने 9 अगस्त 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को लगभग 12 हजार करोड़ की लागत से तैयार कर संचालित किया था। इसे बने करीब 13 वर्ष पूरे हो चुके। इन वर्षों में यहां से साढ़े चार हजार करोड़ से अधिक टोल वसूला जा चुका है। इन वर्षों में टोल दरों में करीब छह बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। टोल वसूली से कंपनी 4570.37 करोड़ की कमाई तक कर चुकी है, जो कुल लागत का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा है। एक्सप्रेसवे पर अभी कंपनी अगले 22 साल यानी वर्ष 2048 तक टोल वसूलेगी।
एक्सप्रेसवे पर नहीं थम रहे हादसे
वहीं, दूसरी ओर यात्री सुरक्षा को लेकर प्रबंधन तमाम दावे करता है, लेकिन हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एक्सप्रेसवे पर औसतन हर तीसरे दिन एक व्यक्ति की जान जा रही है। यहां हादसों का सबसे बड़ा कारण चालक को झपकी आना और वाहनों का ओवर स्पीड होने का दावा किया जाता है। सुविधाओं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दावों के बीच यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर इतनी वसूली और संसाधनों के बावजूद सड़क सुरक्षा उम्मीद के मुताबिक क्यों नहीं सुधर पा रही।

जेवर के सुविधा केंद्र में गंदगी
यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 10 सुविधा केंद्र हैं। इनमें जेवर में स्थित सुविधा केंद्र की हालत खराब है। यहां साफ-सफाई इत्यादि की व्यवस्था नहीं है। जेवर के सुविधा केंद्र की हालत ज्यादा खराब है। पिछले दिनों आगरा के एक विधायक ने भी यमुना विकास के सीईओ से इसकी शिकायत की थी। उन्हें यहां शौचालयों में गंदगी और टंकियां टूटी मिली थीं।
ये सुविधाएं नहीं
1.एक्सप्रेसवे पर हादसों रोकने और सफर सुगम बनाने के लिए विशेष थाना बनाने का दावा था। अब तक थाना नहीं बन सका।
2. ये भी दावे किए गए कि एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए प्रवेश और निकास द्वार निर्धारित हैं। कोई वाहन चालक अपनी मर्जी से किसी भी पॉइंट से एक्सप्रेसवे पर नहीं चढ़ सकता। इसके बावजूद कई चालक रेलिंग के नीचे से बाइक एक्सप्रेसवे पर चढ़ रहे। वहीं, ट्रैक्टर-ट्रॉली के संचालन पर पूर्णता रोक लगाने में प्रबंधन नाकाम है।
3. पूरे एक्सप्रेसवे पर लाइटें तक नहीं लगी हैं, जो सर्दियों में हादसे का बड़ा कारण मानी जाती हैं।

जेके सिंह, सहायक प्रबंधक, यमुना एक्सप्रेसवे, ''यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे रोकने के लिए एंबुलेंस, फायर सेफ्टी वाहन समेत कई विशेष इंतजाम हैं। साथ ही नींद भगाने के लिए रंबल स्ट्रिप और रात के समय चालकों को चाय की व्यवस्था है। अन्य व्यवस्था को लेकर शिकायत के आधार पर भी कार्रवाई की जाती है।''




साइन इन