Work Begins on Precast Drain Project on Narela-Bawana Road in Delhi at a Cost of 55 Crore दिल्ली में 55 करोड़ की लागत से ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू; खास तकनीक की वजह से ना होगा प्रदूषण, समय भी बचेगा, Ncr Hindi News - Hindustan
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दिल्ली में 55 करोड़ की लागत से ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू; खास तकनीक की वजह से ना होगा प्रदूषण, समय भी बचेगा

ड्रेन निर्माण में इस्तेमाल हो रही प्रीकास्ट तकनीक की वजह से साइट पर प्रदूषण का प्रभाव बेहद कम दिखाई देगा, जिसकी वजह से यह प्रोजेक्ट GRAP की पाबंदियों के दौरान भी जारी रह सकता है, जिससे काम तेजी से पूरा हो सकेगा।

Sat, 16 May 2026 05:36 PMSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, अमित झा, नई दिल्ली
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दिल्ली में 55 करोड़ की लागत से ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू; खास तकनीक की वजह से ना होगा प्रदूषण, समय भी बचेगा

दिल्ली में नरेला–बवाना रोड को जलभराव की समस्या से निजात दिलाने लिए रेखा सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शनिवार को यहां प्रीकास्ट (पूर्व निर्मित) RCC नाले के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया और इसके साथ ही यहां काम भी शुरू कर दिया गया। करीब 55 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत नरेला रेलवे क्रॉसिंग से लेकर डीजेबी आउटफॉल तक मार्ग के दोनों ओर करीब 9.5 किलोमीटर लंबे प्रीकास्ट ड्रेन का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें से एक ओर 5 किलोमीटर तो दूसरी ओर 4.5 किलोमीटर नाली बनाई जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह काम दिल्ली के ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में जलभराव की समस्या का दीर्घकालिक और व्यवस्थित समाधान सुनिश्चित करना है। इस मौके पर बोलते हुए मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि, 'प्रीकास्ट तकनीक से निर्माण के जरिए हम तेज, बेहतर और कम असुविधा के साथ निर्माण कर पा रहे हैं। हमारा ध्यान टिकाऊ समाधान देने पर है, ताकि लोगों को धरातल पर वास्तविक बदलाव दिखाई दे।'

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निर्माण के पारंपरिक तरीकों से अलग है प्रीकास्ट तकनीक

अधिकारियों ने बताया कि इस ड्रेन का निर्माण आधुनिक प्रीकास्ट आरसीसी तकनीक से किया जा रहा है। वहीं निर्माण के पारंपरिक तरीकों से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि पारंपरिक तरीकों में जहां साइट पर ही नाली का निर्माण किया जाता है, वहीं प्रीकास्ट तकनीक में निर्माण कार्य के प्रमुख हिस्सों को पहले किसी फैक्ट्री में तैयार कर लिया जाता है, और फिर उन्हें साइट पर असेम्बल (जोड़ देना) कर दिया जाता है।

बेहतर गुणवत्ता, धूल और मलबा भी बेहद कम

इस तकनीक के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल निर्माण कार्य तेज गति से होता है, बल्कि गुणवत्ता, मजबूती और एकरूपता भी बेहतर होती है। साथ ही धूल, मलबा और सड़क पर निर्माण सामग्री फैलने की समस्या भी काफी कम हो जाती है। इसी वजह से इस तकनीक से आम लोगों को असुविधा भी काफी कम होती है, साथ ही यातायात भी सुचारू रूप से चलता रहता है। इसके अलावा इस तकनीक का एक फायदा यह भी है कि निर्माण कार्य की निगरानी और मानकीकरण भी ज्यादा प्रभावी तरीके से हो पाता है।

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ग्रैप की पाबंदियों के दौरान भी चलता रहेगा काम

इस तकनीक का एक अन्य फायदा यह भी है कि इससे साइट पर प्रदूषण का असर बेहद कम होगा, जिसके यह परियोजना GRAP की पाबंदियों के दौरान भी जारी रह सकती है, जिससे प्रोजेक्ट के पूरे होने में लगने वाले समय पर असर नहीं पड़ेगा। इस तकनीक के उपयोग से निर्माण समय कम होने के साथ-साथ लागत का बेहतर प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा, जबकि गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखा जाएगा।

दिल्ली में 55 करोड़ के ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू, इस्तेमाल हो रही खास तकनीक

'प्रीकास्ट की वजह से समय और लागत दोनों की बचत होगी'

उधर मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, 'आज नरेला-बवाना मार्ग पर 9.5 किलोमीटर की सड़क पर 55 करोड़ की लागत से बनने वाले प्रीकास्ट आर.सी.सी. नाले के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। यह परियोजना आधुनिक प्रीकास्ट तकनीक पर आधारित है, जिससे निर्माण कार्य तेजी से पूरा होगा, गुणवत्ता बेहतर रहेगी। इसके साथ-साथ समय और लागत दोनों की बचत होगी तथा नाले की मजबूती और टिकाऊपन भी अधिक रहेगा। इस अवसर पर सांसद योगेन्द्र चन्दोलिया जी, विधायक राज करण खत्री जी सहित कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।'

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दिल्ली के लिए दीर्घकालिक योजना का है हिस्सा

अधिकारियों ने आगे बताया कि यह परियोजना दिल्ली के ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसे आने वाले कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर जल निकासी में सुधार होगा और खासकर मॉनसून के दौरान जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस मौके पर लोक निर्माण मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए।

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