Why Raghav Chadha wont lose Rajyasabha Seat under anti-defection law Number 7 is the key AAP छोड़ BJP में गए, फिर भी दलबदल कानून में क्यों नहीं फंसे राघव चड्ढा? 7 नंबर वाला खेल, Ncr Hindi News - Hindustan
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AAP छोड़ BJP में गए, फिर भी दलबदल कानून में क्यों नहीं फंसे राघव चड्ढा? 7 नंबर वाला खेल

आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा सांसद और कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे राघव चड्ढा ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर आप छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया।

Fri, 24 April 2026 06:44 PMAditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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AAP छोड़ BJP में गए, फिर भी दलबदल कानून में क्यों नहीं फंसे राघव चड्ढा? 7 नंबर वाला खेल

आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा सांसद और कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे राघव चड्ढा ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर आप छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके साथ राज्यसभा के 6 अन्य सांसदों ने भी बीजेपी जॉइन की है। राघव चड्ढा ने ऐलान करते हुए कहा कि वह दो तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में विलय कर रहे हैं। यहां बीजेपी में शामिल होने को तकनीकी रूप से विलय कहा जा रहा है जो दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए एक कानूनी कदम है।

दरअसल संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, अगर कोई सांसद अकेला पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाती है। लेकिन, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उन पर दलबदल कानून लागू नहीं होता। इस मामले में अगर राघव चड्ढा अकेले ही आम आदमी पार्टी छोड़ते, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी राज्यसभा सदस्यता रद्द हो जाती।

ऐसे में राघव चड्ढा ने अपने साथी राज्यसभा सांसदों संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल के साथ घोषणा की कि आम आदमी पार्टी (AAP) के पास राज्यसभा के 10 सांसद हैं, जिनमें से सात यानी ⅔ अब पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में विलय कर रहे हैं।

AAP ने क्यों नहीं किया निष्कासित?

उधर आम आदमी पार्टी ने भी राघव चड्ढा को पार्टी से बर्खास्त नहीं किया। इसके पीछे सीधी सी वजह ये थी कि अगर पार्टी किसी सांसद को निकालती है, तो वह सांसद सदन में अपनी सदस्यता बरकरार रखता है। 'आप' नहीं चाहती थी कि चड्ढा पार्टी से बाहर रहकर भी सांसद बने रहें। हालांकि, राघव चड्ढा ने फिर भी पर्याप्त संख्या बल जुटाकर इस मामले को खत्म कर दिया और सीधे भाजपा में विलय का रास्ता चुन सदस्यता को बरकरार रखने में सफल हुए।

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पंजाब की राजनीति पर गहरा असर

इस टूट का सबसे बड़ा प्रभाव पंजाब पर पड़ेगा। दलबदल करने वाले 7 सांसदों में से 6 सांसद पंजाब से हैं, जिन्हें 2022 में 'आप' की प्रचंड जीत के बाद चुना गया था। अब पंजाब से राज्यसभा में 'आप' का केवल एक सांसद (बलबीर सिंह सीचेवाल) बचा है।

किन-किन सांसदों ने छोड़ी पार्टी

राज्यसभा के जिन सासंदों ने पार्टी छोड़ी उनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी, और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राघव चड्ढा ने पाठक और मित्तल के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आप, जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और जिसे मैंने अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है।

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हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह मित्तल को नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सदस्य हैं। इनमें से दो-तिहाई से अधिक सांसद इस पहल में हमारे साथ हैं। चड्ढा ने कहा, उन्होंने पहले ही साइन कर दिए हैं, और आज सुबह हमने राज्यसभा के सभापति को हस्ताक्षरित पत्रों और अन्य औपचारिक दस्तावेज सहित सभी जरूरी कागजात सौंप दिए हैं। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए चड्ढा ने कहा कि पार्टी अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने ही फायदे के लिए काम कर रही है।

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