Who is Raghav Chadha Rise of AAP rebel leader De-facto Punjab CM to BJP compromised AAP के बागी राघव चड्ढा की कहानी; डि-फैक्टो सीएम से लेकर ‘कंप्रोमाइज्ड लीडर’ तक, India News in Hindi - Hindustan
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AAP के बागी राघव चड्ढा की कहानी; डि-फैक्टो सीएम से लेकर ‘कंप्रोमाइज्ड लीडर’ तक

राघव चड्ढा ने ट्वीट किया, ‘आज भारत के संविधान के नियमों का पालन करते हुए राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से सांसद भाजपा में शामिल हो गए। 7 सांसदों ने उस डॉक्यूमेंट पर साइन किए हैं, जिसे राज्यसभा के माननीय चेयरमैन को सौंपा गया था’

Fri, 24 April 2026 06:19 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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AAP के बागी राघव चड्ढा की कहानी; डि-फैक्टो सीएम से लेकर ‘कंप्रोमाइज्ड लीडर’ तक

आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता रहे राघव चड्ढा की राजनीतिक यात्रा एक बड़े मोड़ पर आ गई है। कभी पार्टी के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली चेहरों में गिने जाने वाले चड्ढा अब AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस पार्टी ने ईमानदारी और पारदर्शिता के नाम पर राजनीति शुरू की थी, वह अब भ्रष्टाचार में डूब चुकी है। राघव चड्ढा का उदय AAP के शुरुआती दौर से जुड़ा रहा है। उन्हें पार्टी के रणनीतिकार के रूप में देखा जाता था और पंजाब में AAP की सरकार बनने के बाद उन्हें डि-फैक्टो मुख्यमंत्री तक कहा जाने लगा था। हालांकि, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिक सकी।

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समय के साथ आम आदमी पार्टी के भीतर राघव चड्ढा की भूमिका कम होती गई और नेतृत्व के साथ मतभेद खुलकर सामने आने लगे। चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी धीरे-धीरे बढ़ती गई। उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया, जो इस टकराव का अहम संकेत माना गया। AAP नेताओं ने उन पर आरोप लगाया कि वे पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे हैं और केंद्र सरकार के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं। वहीं, चड्ढा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे सार्थक बहस और राजनीति में विश्वास रखते हैं, न कि टकराव की राजनीति में।

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2/3 सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ

आखिरकार 24 अप्रैल को राघव चड्ढा ने अन्य सांसदों के साथ मिलकर AAP से अलग होने और BJP में शामिल होने का फैसला किया। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से पार्टी हेडक्वार्टर में मुलाकात की। राज्यसभा में AAP के 2/3 सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए दो-तिहाई सांसदों के साथ पार्टी का विलय किया, जिससे उन पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई का खतरा भी नहीं रहा।

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राघव चड्ढा ने ट्वीट किया, 'आज भारत के संविधान के नियमों का पालन करते हुए, राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से ज़्यादा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं। 7 सांसदों ने उस डॉक्यूमेंट पर साइन किए हैं, जिसे राज्यसभा के माननीय चेयरमैन को सौंपा गया था। मैंने 2 और सांसदों के साथ खुद साइन किए हुए डॉक्यूमेंट सौंपे हैं।' इस कदम को AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर हुई है। आप ने इस पूरे घटनाक्रम को पीठ में छुरा घोंपना करार दिया है और बीजेपी पर पार्टी को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया है। वहीं, राघव चड्ढा के इस फैसले को उनके राजनीतिक करियर का नया अध्याय माना जा रहा है। जहां वे एक समय के उभरते नेता से अब विवादों और आरोपों के बीच नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।