सिर्फ समोसा नहीं, इस वजह से AAP से किनारे हो गए राघव चड्ढा, पूरी इनसाइड स्टोरी
आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल के कभी करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच अब मनमुटाव खुलकर सामने आ गया है। 'आप' ने चड्ढा पर राज्यसभा में बड़े मुद्दों को ना उठाने का आरोप लगाते हुए डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल के कभी करीबी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच अब मनमुटाव खुलकर सामने आ गया है। 'आप' ने चड्ढा पर राज्यसभा में बड़े मुद्दों को ना उठाने का आरोप लगाते हुए डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है और उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उप-नेता नियुक्त किया है। शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने उन पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राघव चड्ढा बड़े राष्ट्रीय मुद्दों उठाने के बजाय एयरपोर्ट पर 'समोसे की कीमत' जैसे मुद्दे उठाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी जोर पकड़ती नजर आ रही है। लेकिन इस बीच ये जानलेना जरूरी है कि समोसे वाले मुद्दे के अलावा आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच आई इन दूरियों की वजह क्या है।
पार्टी के भीतर यह नाराजगी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव से शुरू हुई, जिस पर राघव चड्ढा ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि राघव चड्डा ने इस पर साइन करने से इनकार कर दिया था। आतिशी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि चड्ढा आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा से इतने डरे हुए क्यों हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे, तब चड्ढा लंदन में थे। उन्होंने कहा, कि वह आंख का इलाज करवाने के लिए लंदन गए हुए हैं। आतिशी ने कहा, तब मीडिया ने हमसे कई सवाल किए लेकिन हमने यही कहा कि आप आंख का इलाज करवाने गए हैं। लेकिव अब मैं आपसे पूछना चाहती हूं कि क्या आप तब भी प्रधानमंत्री मोदी से डर गए थए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब भ्रष्टाचार के मामलों में केजरीवाल और सिसोदिया को अदालत से राहत मिली, तब भी चड्ढा ने चुप्पी साधे रखी।
पंजाब के सीएम ने भी साधा निशाना
वहीं,पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को पार्टी सहयोगी और राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि वह दबाव में काम कर रहे थे और उन्होंने आप के रुख के विपरीत काम किया है।
मान ने कहा कि अगर चड्ढा पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने जैसे मुद्दों पर बोलने को तैयार नहीं हैं, महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद से बहिर्गमन नहीं करते हैं या गुजरात में कई 'आप' कार्यकर्ताओं और नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं, तो यह पार्टी के रुख से अलग होना है।
मुख्यमंत्री यहां एक संवाददाता सम्मेलन में राघव चड्ढा के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। राज्यसभा सदस्य चड्ढा ने सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार नहीं समझ लेना।
आप ने चड्ढा पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को उन पर संसद में केंद्र के खिलाफ मुद्दे उठाने से कतराने और इसके बजाय ''अपने प्रचार-प्रसार के लिए काम करने'' का आरोप लगाया। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नीत पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने चड्ढा की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या ऐसा कोई व्यक्ति जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ''डरता'' है, देश के लिए लड़ सकता है?
मान से जब पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि चड्ढा दबाव में काम कर रहे थे,'' तो जवाब में उन्होंने कहा, हां। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में दलों द्वारा अपने नेताओं को बदलना कोई असामान्य बात नहीं है।
राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से चड्ढा को हटाए जाने के सवाल पर मान ने कहा, जब मैंने पहली बार चुनाव जीता (2014 में संगरूर लोकसभा से), तो डॉ (धर्मवीर) गांधी (तत्कालीन आप सांसद, जो अब कांग्रेस में हैं) को पार्टी के संसदीय बोर्ड का नेता बनाया गया था। बाद में, मैंने भी इस पद पर कार्य किया। इसलिए, पार्टी इस तरह के फैसले लेती रहती है।
राघव चड्ढा ने मीम्स पर दिया था रिएक्शन
बता दें, पिछले शुक्रवार को चड्ढा ने राज्यसभा में लोकप्रिय मुद्दों को उठाने पर बन रहे मीम्स के प्रति अपना प्यार जताया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, आप लोग वाकई क्रिएटिव हैं। इन्हें जारी रखिए। दरअसल चड्ढा इस बजट सत्र में खूब सुर्खियां बटोर रहे थे, क्योंकि वे मोबाइल रिचार्ज की परेशानियों से लेकर फ्रूट जूस के कार्टन के अंदर क्या है जैसे आम, लोगों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे।
भाषा से इनपुट




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