नोएडा में बवाल; अफवाह फैलाने वालों पर ऐक्शन, दो हैंडल के खिलाफ केस
नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सोमवार को श्रमिकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। इसमें तोड़फोड़ और आगजनी हुई। पुलिस ने स्थिति काबू में की और स्पष्ट किया कि कोई गोलीबारी नहीं हुई है।

नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर श्रमिकों का प्रदर्शन सोमवार को हिंसक हो गया। फेज-2 और सेक्टर-60 जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। यही नहीं वाहनों को आग के हवाले भी कर दिया। बवाल के कारण दिल्ली-नोएडा सीमा पर भारी ट्रैफिक जाम लग गया और हजारों यात्री फंस गए। यूपी पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया और कोई गोलीबारी नहीं की गई। इस बीच पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले दो सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
2 सोशल मीडिया हैंडल्स पर FIR
यूपी पुलिस ने बताया कि वह नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर अफवाहें फैलाने वाले 2 सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ FIR दर्ज कर रही है। नोएडा पुलिस ने 2 सोशल मीडिया हैंडल्स (इलियास और अंशुल तिवारी) को जोड़ कर दिए अपने बयान में बताया कि कुछ हैंडल्स की ओर से फेक खबर फैलाई जा रही है कि पुलिस की फायरिंग में 14 लोग मारे गए हैं जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। अब पुलिस की ओर से 2 सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
ना फैलाएं गलत जानकारी
पुलिस ने अपने बयान में कहा कि नोएडा में कई जगहों पर प्रदर्शन हुए जिनको कथित तौर पर राज्य के बाहर के तत्वों ने उकसाया था लेकिन केवल एक जगह पर हिंसा हुई जिसे कम से कम बल का इस्तेमाल करके काबू में कर लिया गया। पुलिस ने साफ किया कि घटना के दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई। ऐसे में लोगों से आग्रह है कि वे गलत जानकारी ना फैलाएं। पुलिस ने आगे कहा कि जो लोग झूठी और गुमराह करने वाली जानकारी फैला रहे हैं और लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं उन पर ऐक्शन लिया जा रहा है।
बवाल से भारी जाम, गाड़ियों की लंबी कतारें
पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को फेज-2 और सेक्टर-60 में वाहनों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की। हंगामे की वजह से दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर कई किलोमीटर तक गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। सेक्टर-62, सेक्टर-84 और नेशनल हाईवे-9 पर भी मजदूरों ने प्रदर्शन किया। हिंसा के बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला। पूरे औद्योगिक क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। गौर करने वाली बात यह कि हिंसा प्रशासन की ओर से श्रमिकों के हक में लिए गए फैसलों के अगले दिन हुई है।





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