नोएडा सैलरी बवाल के पीछे नक्सल तो नहीं? योगी ने जताई आशंका, खुफिया तंत्र को चौकसी का आदेश
नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहे मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसके पीछे नक्सल कनेक्शन की आशंका जताई है। उन्होंने इसे संभावित बड़ी साजिश बताते हुए खुफिया तंत्र को अलर्ट रहने के आदेश दिए हैं।
यूपी के नोएडा फेज-2 में सैलरी बढ़ोतरी की मांग को लेकर चल रहे मजदूरों के प्रदर्शन के बीच हिंसा भड़कने के बाद योगी सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नक्सलवाद को दोबारा जिंदा करने की 'बड़ी साजिश' की आशंका जताई है। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को भड़काऊ और विघटनकारी तत्वों के खिलाफ सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
रविवार रात लखनऊ में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जारी बयान में सीएम योगी ने कहा कि देश में नक्सलवाद अब समाप्ति की कगार पर है, लेकिन कुछ ताकतें श्रमिक असंतोष का फायदा उठाकर इसे दोबारा जीवित करने की कोशिश कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्ति की स्थिति में है, लेकिन इसे फिर से जिंदा करने के प्रयास एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। हाल ही के कुछ प्रदर्शनों में भ्रामक एवं विघटनकारी तत्वों के शामिल होने की आशंका है।
सीएम के निर्देश के बाद गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी और गोरखपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। योगी आदित्यनाथ ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे अगले 24 घंटों के भीतर उद्योग निकायों और श्रमिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके और स्थिति और न बिगड़े।
हिंसा भड़काने वालों की तलाश में जुटी पुलिस
यूपी के डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि हिंसा भड़काने वाले और बाहरी तत्वों की पहचान की जा रही है और उनकी पहचान होते ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए कहा है कि हालात सामान्य किए जा रहे हैं।
क्या है मामला
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा में पिछले कई दिनों से चल रहा फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले लिया। वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों प्राइवेट कर्मचारी सोमवार को उग्र हो गए और कई जगहों पर तोड़फोड़, आगजनी और पथराव किए। प्रदर्शन की शुरुआत गुरुग्राम से हुई थी, जो धीरे-धीरे नोएडा की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तक फैल गई। आज हालात तब बिगड़ गए जब कुछ प्रदर्शनकारी समूहों ने फैक्ट्रियों के बाहर खड़ी गाड़ियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
नोएडा सेक्टर 62 स्थित मदरसन ग्रुप की फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने जमकर हंगामा किया। गाड़ियों के शीशे तोड़े गए, कई वाहनों में आग लगा दी गई और पुलिस पर पथराव भी किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि इस बार उनकी वेतन बढ़ोतरी मात्र 250 से 300 रुपये किया गया, जो महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन अठारह-बीस हजार रुपये प्रति माह तय किया जाए।
10 हजार से 15 हजार रुपये मिलती है सैलरी
मजदूरों का आरोप है कि वर्तमान में नोएडा की फैक्ट्रियों में औसत वेतन 10-15 हजार रुपये के बीच है, जो जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। वहीं, एनसीआर क्षेत्र में निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को लगभग 700 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जो महीने में करीब 21 हजार रुपये के बराबर होता है। जानकारी के मुताबिक, हजारों की संख्या में कर्मचारी पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन आज स्थिति अचानक बेकाबू हो गई। कई औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनियों के बाहर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं।




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