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'ये याचिकाएं हमें डिस्टर्ब करती हैं', दिल्ली HC ने फटकारा; कहा- क्या आपको कोई और बुराई नहीं दिखती

दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार एक ही समस्या को लेकर जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए एक एनजीओ को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का सरासर दुरुपयोग है। क्या आपको समाज में कोई और बुराई नहीं दिखती?

Thu, 15 Jan 2026 03:44 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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'ये याचिकाएं हमें डिस्टर्ब करती हैं', दिल्ली HC ने फटकारा; कहा- क्या आपको कोई और बुराई नहीं दिखती

दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार एक ही समस्या को लेकर जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए एक एनजीओ को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि यह जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का सरासर दुरुपयोग है। क्या आपको समाज में कोई और बुराई नहीं दिखती?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में मस्जिदों और दरगाहों द्वारा अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए बार-बार जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए एक गैर सरकारी संगठन को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने गौर किया कि इसी तरह की याचिकाएं हर दूसरे दिन सूचीबद्ध की जा रही थीं। पीठ ने इसे जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का सरासर दुरुपयोग बताया।

यह याचिका गैर सरकारी संगठन सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर की गई थी। इसमें ग्रीन पार्क क्षेत्र में एक मस्जिद द्वारा कथित अवैध अतिक्रमण का मामला उठाया गया था। बेंच ने बार-बार जनहित याचिकाएं दायर किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र का सरासर दुरुपयोग है। क्या आपको समाज में कोई और बुराई नहीं दिखती?

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कोर्ट ने कहा कि डीडीए, एमसीडी, राष्ट्रीय कार्य बल और पुलिस की ओर से देरी को समझा जा सकता है। लेकिन, हर दिन एक ही तरह की याचिकाएं बार-बार दायर करना उचित नहीं है। मानवता की सेवा करने के बेहतर तरीके बताते हुए कोर्ट ने कहा कि एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार जनहित याचिकाएं दायर करने की प्रथा पर अंकुश लगाने की जरूरत है।

मुख्य न्यायाधीश ने गैर सरकारी संगठन के वकील से मौखिक रूप से कहा कि क्या आप केवल एक ही प्रकार का अतिक्रमण देखते हैं? ये याचिकाएं हमें परेशान करती हैं। दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कहा कि मस्जिद के सीमांकन की प्रक्रिया में डीडीए ने भी भाग लिया था। उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठन एक विशेष समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर याचिकाएं दायर कर रहा है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को तय की।

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