अनिल अंबानी के बेटे अनमोल को झटका, HC का नोटिस रद्द करने से इनकार, कहा- 10 दिन में जवाब दें
उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी को हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट ने आरएचएफएल के बैंक खाते को लेकर जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अनमोल से 10 दिनों के भीतर बैंक के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा।

उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी को हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट ने आरएचएफएल के बैंक खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित करने की कार्यवाही के संबंध में जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अनमोल से 10 दिनों के भीतर बैंक के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस जसमीत सिंह ने याचिकाकर्ता और आरएचएफएल के निदेशक जय अनमोल अंबानी को 10 दिनों के भीतर बैंक के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि बैंक द्वारा इसके बाद लिए गए किसी भी निर्णय का प्रभाव इस मामले में अदालत के आदेश के अधीन होगा। जज ने बैंक को भी एक स्पष्ट आदेश जारी करने और उसे कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने जय अनमोल अंबानी से कहा, ‘‘आप कारण बताओ नोटिस में अपनी दलीलें पेश करें। आपको जो भी कहना है, वे उसका जवाब देंगे। मैं कारण बताओ नोटिस पर रोक नहीं लगाऊंगा। मैं यह नहीं कहूंगा कि वे मामले में आगे नहीं बढ़ें। मैं रिट याचिका को लंबित रखूंगा। देखते हैं क्या आदेश आता है।’’
हाई कोर्ट ने कहा कि पक्षों के बीच यह सहमति हुई है कि याचिकाकर्ता आज से 10 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देगा। 30 जनवरी को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होगा। याचिकाकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि को सुनने के बाद प्रतिवादी एक आदेश जारी करे, जिसे अगली सुनवाई की तिथि पर कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। उक्त आदेश का प्रभाव याचिका में पारित किए जाने वाले आदेश के अधीन रहेगा। अदालत ने याचिका पर नोटिस जारी किया और 27 फरवरी के लिए इसे सूचीबद्ध कर दिया।
जय अनमोल अंबानी के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि 22 दिसंबर 2025 को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस मूल रूप से त्रुटिपूर्ण’ था। उन्होंने दलील दी कि चूंकि आरएचएफएल के लिए समाधान योजना को सभी ऋणदाता बैंकों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही अनुमोदित कर दिया गया था, इसलिए कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के कोई आरोप नहीं बनते। यह भी कहा गया कि किसी भी स्थिति में बैंक के पास 2020 से ही संबंधित जानकारी मौजूद थी और पांच साल बाद कारण बताओ नोटिस जारी करना कानून के विरुद्ध है।
बैंक के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कारण बताओ नोटिस जारी करने के दौरान न्यायालय का अधिकार क्षेत्र सीमित था। जज ने बैंक के वकील से पूछा कि दिवाला कानून के तहत समाधान योजना की मंजूरी के बाद कारण बताओ नोटिस कैसे जारी किया गया। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार किया जाना चाहिए।
यह नोटिस हाई कोर्ट ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा याचिकाकर्ता को जारी किए गए उस नोटिस को रद्द करने के बाद जारी किया था, जिसमें कंपनी के बैंक खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित करने की मांग की गई थी। पिछले साल 19 दिसंबर को हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस आधार पर राहत दी थी कि उसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया था क्योंकि इसे उस पते पर भेजा गया था जिसे कंपनी ने 2020 में खाली कर दिया था।
सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्व में आंध्र बैंक) के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में जय अनमोल अंबानी और आरएचएफएल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। धोखाधड़ी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को लगभग 228 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सीबीआई ने आरएचएफएल, जय अनमोल अंबानी और कंपनी के निदेशक रवींद्र शरद सुधाकर के खिलाफ बैंक की शिकायत पर कार्रवाई की। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने व्यावसायिक जरूरतों के लिए मुंबई स्थित बैंक की एससीएफ शाखा से 450 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी किस्त चुकाने में विफल रही। इसलिए 30 सितंबर 2019 को उक्त खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया।




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