दिल्ली से कश्मीर तक कैमरे लगाने की थी योजना, PAK के लिए जासूसी करने वाले गैंग की खुलने लगी साजिश
पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह की साजिश धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है। पुलिस ने बुधवार को सोनीपत रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में पोल पर लगाए गए सोलर आधारित जासूसी कैमरे को बरामद कर लिया। यह कैमरा आरोपी प्रवीन की निशानदेही पर बरामद किया गया, जिसने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह की साजिश धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है। गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने बुधवार को हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन के आउटर इलाके में पोल पर लगाए गए सोलर आधारित जासूसी कैमरे को बरामद कर लिया। यह कैमरा आरोपी प्रवीन की निशानदेही पर बरामद किया गया, जिसने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह का प्लान दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक रेलवे लाइन और संवेदनशील इलाकों में कैमरे लगाकर निगरानी का नेटवर्क तैयार करना था। पुलिस के मुताबिक बरामद किया गया कैमरा बेहद चालाकी से रेलवे ट्रैक के पास एक ऊंचे पोल पर लगाया गया था, ताकि ट्रेनों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। कैमरे में सोलर पैनल लगा होने के कारण इसे लगातार बिजली सप्लाई की जरूरत नहीं थी, जिससे यह लंबे समय तक बिना किसी संदेह के काम करता रहा।
एक कैमरा लगाने के बदले 16 हजार रुपये
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी प्रवीन को इलेक्ट्रिकल और सर्विलांस उपकरण लगाने का अच्छा अनुभव था। उसके पिता इलेक्ट्रिशियन हैं और उसी के साथ काम करते हुए उसने कैमरे और वायरिंग से जुड़ा काम सीखा था। इसी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल उसने जासूसी नेटवर्क के लिए किया। प्रवीन ने पुलिस को बताया कि उसे हर एक कैमरा लगाने के बदले 16 हजार रुपये दिए जाते थे। उसे लोकेशन और तकनीकी निर्देश पहले ही दे दिए जाते थे, जिसके आधार पर वह मौके पर जाकर कैमरा इंस्टॉल करता था। कैमरे को इस तरह सेट किया जाता था कि लाइव एक्सेस पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को मिल सके।
पहले दिल्ली कैंट, फिर सोनीपत रेलवे स्टेशन चुना
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने सबसे पहले दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन को टारगेट बनाया था, जहां पहले ही एक कैमरा बरामद किया जा चुका है। इसके बाद सोनीपत रेलवे स्टेशन को चुना गया, जो उत्तर भारत की महत्वपूर्ण रेलवे लाइन में शामिल है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रेलवे स्टेशन इसलिए चुने गए, क्योंकि यहां सुरक्षा बलों की आवाजाही, ट्रेन मूवमेंट और संवेदनशील गतिविधियां आसानी से कैद की जा सकती हैं।
संदिग्धों को आमने-सामने बैठाकर सवाल पूछे
गिरफ्तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े छह संदिग्धों से पुलिस कस्टडी रिमांड पर पूछताछ जारी है। पहले दिन एनआईए, आईबी और एटीएस की टीमों ने आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। वहीं, बुधवार देर रात पुलिस ने मुख्य आरोपी के अलावा बाकी पांच लोगों के मोबाइल भी बरामद कर लिए। अब पुलिस इन सभी मोबाइलों का डेटा खंगालकर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
हापुड़ के अजीम ने वीडियो पाकिस्तान भेजी थी
मेरठ। हापुड़ का अजीम राणा पिछले छह माह से लगातार पाकिस्तान के आतंकी और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में था। अजीम ने शहजाद भट्टी के कहने पर ही दिल्ली के सनातन धर्म मंदिर की रेकी की और वीडियो बना उसे भेजी थी। कुछ अन्य वीडियो भी अजीम ने भट्टी को भेजी थी। शहजाद भट्टी अजीम से पंजाब जाने के लिए कह रहा था, उसे एक पार्सल कहीं से उठाकर दूसरी जगह डिलीवर करने का टास्क दिया गया था।
ग्रुप का लॉरेंस बिश्नोई 007 नाम रखा था
दो आरोपियों से क्राइम ब्रांच कार्यालय में अलग से पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां इनके मोबाइल, बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। पता चला कि आरोपियों ने ग्रुप का नाम लॉरेंस बिश्नोई 007 रखा था । अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने अब तक कितनी जगहों की जानकारी भेजी और किन-किन लोगों से संपर्क में थे। मोबाइल से मिले साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है ताकि आरोपी गुमराह न कर सकें।
सुहेल मुंबई भी जा चुका है
आईएसआई की साजिश में मुंबई का कनेक्शन तो पहले ही सामने आ चुका था। बुधवार को मुंबई से जुड़े कुछ और साक्ष्य की जानकारी मिली है। सुहेल पुणे में रहा था और वह मुंबई भी जा चुका है। मुंबई में पुलिस के लिए मुखबिरी करने के वाली एक महिला के संपर्क में आया था। बताया जा रहा है कि महिला बाद में आईएसआई एजेंट बन गई थी और उसने सुहेल समेत कई युवाओं को बरगलाकर व्हाट्ऐप ग्रुप में भी जोड़ा था। हालांकि पुलिस सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।




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