बम फटने जैसी आई आवाज, दिल्ली के साकेत में 30 साल पुरानी इमारत पर अवैध निर्माण से हादसा?
दक्षिणी दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब इलाके में पुरानी इमारत पर ऊपर की मंजिल का निर्माण कार्य कराने से शनिवार देर शाम बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में दबे 13 घायलों को निकालकर एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

दक्षिणी दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलाजाब में शनिवार शाम को एक 5 मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इस बिल्डिंग कई ऑफिस और कोचिंग सेंटर चल रहे थे। हादसे में कई लोगों के मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे एनडीआरएफ, पुलिस, दमकल और सिविल डिफेंस कर्मियों ने देर रात खबर लिखे जाने तक 13 घायलों को निकालकर एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस के अनुसार, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक कोचिंग सेंटर था और ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य चल रहा था। आशंका है कि मलबे में फंसे लोग छात्र हो सकते हैं।
सैदुलाजाब के स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह बिल्डिंग करीब 30 साल पुरानी थी। ऐसे में इसके ऊपर अवैध तरीके से अतिरिक्त मंजिल का निर्माण कराना खतरनाक साबित हुआ और यह भरभरा कर गिर गई।
सूत्रों ने बताया कि हादसे की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस चार मंजिला इमारत में तीसरी मंजिल का निर्माण कार्य अभी चल रहा था। निर्माण का दबाव इमारत नहीं झेल पाई और शनिवार रात करीब पौने 8 बजे यह गिर गई।
इसका हिस्सा बगल में स्थित एक अस्थायी टिन की छत में चलने वाली कैंटीन पर गिरा और वहां खाना खा रहे छात्र और कुछ अन्य लोग इसकी चपेट में आ गए। पुलिस ने इस संबंध में लापरवाही बरते जाने का मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। हादसे के बाद से मकान मालिक व ठेकेदार फरार हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है और कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।
आवाज सुनकर लगा कोई बम फटा
सैदुलाजाब में जिस जगह मकान गिरा, वहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं। ऐसे में अचानक मकान गिरने से जोरदार आवाज आई, जिसे सुनकर छात्रों में अफरातफरी मच गई। छात्र जब लाइब्रेरी एवं पीजी से बाहर निकले तो वहां धुएं का गुबार था। छात्रों ने बताया कि मकान गिरने के समय लगा जैसे कोई बम फट गया हो। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन बाद में जान बचाने के लिए वह लोग एक खाली प्लॉट की तरफ भागकर चले गए।
यहां रहकर पढ़ाई कर रहे डॉ. गुलाब ने बताया कि जिस समय मकान गिरा, वह अपने दोस्तों के साथ सामने एक लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे थे। वह दूसरी मंजिल की लाइब्रेरी में बैठे थे। उसी समय जोरदार धमाके के साथ यह मकान भरभरा कर गिर गया। वह अन्य छात्रों के साथ जब बाहर निकले तो देखा कि चारों तरफ धुएं का गुबार है। लोग इधर-उधर भाग रहे थे। हादसे के लगभग तीन घंटे बाद भी उनके पैर कांप रहे हैं। एक अन्य छात्र राहुल यादव अपने एक दोस्त की फोटो लेकर इधर-उधर घूम रहा था। वह पुलिस के पास भी इस फोटो को लेकर गया और बताया कि उसका दोस्त लापता है।
पीडब्ल्यूडी इमारतों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराएगा
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) दिल्ली की सभी इमारतों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराएगा। विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कार्यकारी अभियंताओं को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रत्येक इमारत का ऑडिट कराना होगा और 25 जून से पहले प्रमाण पत्र जारी करना होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी इमारत में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे रखरखाव कार्यों के तहत दूर किया जाए और राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
संकरी गलियों में ऊंची इमारतें तन रहीं
लोगों का आरोप है कि संकरी गलियों में उंची-उंची इमारत बनाने से अक्सर खतरा बना रहता है। पुरानी इमारत पर निर्माण कार्य कराने से स्थिति और भयावह हो जाती है। इलाके में इस तरह से कई अवैध निर्माण किए गए हैं। हालांकि, इस पर प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। देर रात तक स्थानीय पुलिस, फायर विभाग, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई थीं।
इमारत में 300 से 400 लोग रहते थे मौजूद
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि यह कमर्शियल बिल्डिंग थी। घटना के समय अंदर कितने लोग थे, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। आमतौर पर यहां 300 से 400 लोग मौजूद रहते हैं, लेकिन उम्मीद है कि इमारत गिरने के समय अंदर कम ही लोग थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि पास ही टिनशेड में कैंटीन चल रही थी, मलबे की चपेट में आने से वहां खाना खा रहे कई लोग दब गए। वहां से कुछ लोगों को निकाल लिया गया और उन्हें चोट आई है। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि यह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी, जहां छात्रों की क्लास लगती थीं और लोग काम करते थे। उन्होंने बताया कि अगर यह हादसा ऑफिस टाइम के दौरान हुआ होता, तो बहुत भयावह होता। लगता है कि इस समय भी तीन-चार लोग नाइट शिफ्ट में काम कर रहे होंगे, और वे घायल या मृत हो सकते हैं।
अवैध तरीके से हो रहा था निर्माण
मौके पर मौजूद फायर विभाग के अधिकारी रविंदर सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि चार मंजिला इमारत (ग्राउंड+तीन) बगल में स्थित एक अस्थायी टिन की छत वाली कैंटीन पर गिर गई। इमारत की तीसरी मंजिल पर अवैध तरीके से निर्माण कार्य चल रहा था। इस कार्य की वजह से पुरानी इमारत गिर गई। हादसे के वक्त कैंटीन में कुछ बच्चे खाना खा रहे थे और वे उसके नीचे दब गए।




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