दिल्ली में इस साल अब तक आग से 45 लोगों की गई जान, कौन सा महीना रहा सबसे घातक?
दिल्ली में इस साल 1 जनवरी से 27 मई तक आग लगने की घटनाओं में 45 लोगों की जान जा चुकी है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के आंकड़ों की ओर से यह जानकारी मिली है।

दिल्ली में इस साल 1 जनवरी से 27 मई तक आग लगने की घटनाओं में 45 लोगों की जान जा चुकी है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के आंकड़ों के अनुसार, इन लोगों में अकेले मई में 13 लोगों की मौत हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी से अप्रैल के बीच आग लगने की घटनाओं में 32 लोगों की मौत हुई और मई के पहले 27 दिन के दौरान 13 मौतें दर्ज की गईं। इससे कुल संख्या 45 हो गई।
मार्च में ही 15 लोगों की मौत
दिल्ली अग्निशमन सेवा की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च इस साल का सबसे घातक महीना रहा। इसमें आग से संबंधित घटनाओं में 15 लोगों की मौत हुई।
कब कितनी मौतें?
डीएफएस के रिकॉर्ड बताते हैं कि जनवरी में 6, फरवरी में 6, मार्च में 15 और अप्रैल में 5 लोगों की आग की घटनाओं में मौत हुई। गर्मी के महीनों में शहर में आग लगने की घटनाओं में भारी बढोतरी देखी गई। दिल्ली में जनवरी में 1,396; फरवरी में 1,096; मार्च में 1,538 और अप्रैल में 2,663 सूचनाएं आग लगने की प्राप्त हुईं।
मई के पहले 26 दिन में 2,877 घटनाएं
मई के पहले 26 दिन में ही अग्निशमन विभाग को आग लगने की 2,877 घटनाओं की सूचना फोन पर मिली, जो अप्रैल की तुलना में कहीं अधिक है। आंकड़ों से पता चला कि जनवरी में आग लगने की घटनाओं में 41 लोग घायल हुए या बचाए गए, फरवरी में 46, मार्च में 68 और अप्रैल में 119 लोग घायल हो गए या उन्हें बचा लिया गया। मई में, 26 मई तक आग लगने की घटनाओं में 99 लोगों के घायल होने या बचाए जाने की सूचना मिली।
कूड़े में लगने की घटनाएं भी ज्यादा
कचरे और कूड़े में लगने वाली आग की घटनाओं की संख्या भी काफी रही। जनवरी में ऐसी 441 घटनाएं, फरवरी में 331, मार्च में 539 और अप्रैल में 725 घटनाएं दर्ज की गईं। 26 मई तक, विभाग ने कचरे में आग लगने की 766 शिकायतों पर कार्रवाई की।
अधिकारियों ने कहा कि गर्मी के महीनों के दौरान तापमान में बढ़ोतरी और शुष्क मौसम के कारण आमतौर पर आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। डीएफएस के आंकड़ों से पता चला कि मई में आपातकालीन कॉल और बचाव अभियानों की कुल संख्या में वृद्धि हुई, लेकिन आग से संबंधित मौत के मामले मार्च में दर्ज किए गए सर्वाधिक मामलों से कम रहे।




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