release could disturb public peace, JJB denies bail to accused minors in Uttam Nagar violence case इनकी रिहाई से शांति भंग हो सकती है; तरुण हत्याकांड में दो नाबालिगों को जमानत देने से JJB का इनकार, Ncr Hindi News - Hindustan
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इनकी रिहाई से शांति भंग हो सकती है; तरुण हत्याकांड में दो नाबालिगों को जमानत देने से JJB का इनकार

युवक की हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए दोनों नाबालिगों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, पीठासीन अधिकारी चित्रांशी अरोड़ा ने 9 अप्रैल को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस समय नाबालिगों की रिहाई उचित नहीं है।

Fri, 10 April 2026 05:53 PMSourabh Jain पीटीआई, नई दिल्ली
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इनकी रिहाई से शांति भंग हो सकती है; तरुण हत्याकांड में दो नाबालिगों को जमानत देने से JJB का इनकार

दिल्ली के उत्तम नगर में होली की रात हुई युवक की हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए दो नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। बोर्ड ने दोनों की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी रिहाई से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है, साथ ही उनकी सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। दोनों नाबालिगों को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान दो परिवारों के बीच हुई झड़प में तरुण नाम के युवक की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

पिछले महीने 4 मार्च को होली के त्योहार की रात को तरुण की हत्या उस वक्त हुई थी, जब उत्तम नगर में आमने-सामने रहने वाले दो अलग-अलग समुदाय के पड़ोसी परिवारों के बीच रंग लगाने को लेकर विवाद हो गया था। इसी दौरान हुई झड़प के दौरान तरुण गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था। यह झगड़ा तब शुरू हुआ जब तरुण के परिवार की एक लड़की द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा गलती से दूसरे समुदाय की एक महिला को लग गया था।

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बोर्ड ने कहा- नाबालिगों की रिहाई से बढ़ेगा तनाव

युवक की हत्या के मामले में आरोपी बनाए गए दोनों नाबालिगों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, पीठासीन अधिकारी चित्रांशी अरोड़ा ने 9 अप्रैल को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस समय नाबालिगों की रिहाई उचित नहीं है, क्योंकि उनकी रिहाई से इलाके में तनाव बढ़ सकता है, और जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा है।

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'न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा जनता का भरोसा'

इसके अलावा बोर्ड ने कहा कि दोनों आरोपियों को राहत देने से न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा भी कम हो सकता है। बोर्ड ने यहां तक कहा कि वर्तमान माहौल को देखते हुए उनके लिए भी खतरा है, और उनकी रिहाई से उन्हें शारीरिक और मानसिक खतरे का सामना भी करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान JJB ने जांच अधिकारी की दलीलों पर गौर किया, जिसमें कहा गया था कि इस घटना से इलाके में समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया है, और इसका सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गहरा असर पड़ा है।

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'पढ़ाई जरूरी, लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकते'

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा नाबालिगों की पढ़ाई बाधित होने की दलील भी दी गई, जिसे बोर्ड ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पढ़ाई महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा और सुरक्षात्मक पुनर्वास के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बोर्ड ने कहा कि हिरासत में रहने से उन्हें एक व्यवस्थित वातावरण में काउंसलिंग, शिक्षा और चिकित्सा सहायता मिलती रहेगी।

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'यह कोई सजा नहीं, बल्कि उनकी सजा के लिए जरूरी'

बोर्ड ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत 'बच्चे का सर्वोत्तम हित' ही सर्वोपरि है और नाबालिगों को सुरक्षात्मक हिरासत में रखना कोई सजा नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल, सुरक्षा, मानसिक स्थिरता और पुनर्वास के लिए जरूरी है। बोर्ड ने अपनी बात के समर्थन में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत दी गई न्याय की अवधारणा को भी स्पष्ट किया।

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