मानसून में जलभराव रोकने को दिल्ली सरकार मुस्तैद, अबतक इतने टन गाद निकलवा चुकी, मंत्री ने लिया सफाई का जायजा
मंत्री ने बताया कि दिल्ली गेट का जो नाला पिछले लगभग 40 साल से गाद के चलते ढका हुआ था, उसे आखिरकार अब पूरी तरह सफाई के जरिए खोल दिया गया है, यहां 21,000 मीट्रिक टन से ज्यादा गाद निकाली जा चुकी है।

दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। शुक्रवार को दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने दिल्ली गेट और बारापुल्ला नाले के पास चल रहे गाद निकालने के काम का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि मार्च महीने तक शहर के अलग-अलग नालों से लगभग 14 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली जा चुकी है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बताया कि सरकार इस साल गाद निकालने के अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी में है। उन्होंने कहा ‘पिछले साल हमने कुल 20 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली थी, लेकिन इस साल हमारा लक्ष्य 28 लाख मीट्रिक टन है। अब तक हम निर्धारित लक्ष्य का 50 प्रतिशत काम पूरा कर चुके हैं और बाकी गाद अगले कुछ दिनों में निकाल ली जाएगी।’
40 साल से गाद के चलते ढका हुआ था
मंत्री ने बताया कि दिल्ली गेट का जो नाला पिछले लगभग 40 साल से गाद के चलते ढका हुआ था, उसे आखिरकार अब पूरी तरह सफाई के जरिए खोल दिया गया है, यहां 21,000 मीट्रिक टन से ज्यादा गाद निकाली जा चुकी है।
घरों तक पहुंच जाता है गंदा पानी
प्रवेश वर्मा ने इस दौरान बताया कि निकाली गई गाद के सूख जाने के बाद इसे ऐसी जगह पर भेज दिया जाता है जहां पर मिट्टी की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि गाद में ज्यादात्तर मिट्टी ही होती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली गेट और बारापुल्ला नाले के आस-पास के इलाकों में मानसून सीजन के दौरान लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंच जाता है और ऐसा कई साल से होता आ रहा है।
सीएम ने की थी समीक्षा बैठक
जलभराव की चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक दिन पहले ही मानसून तैयारियों की समीक्षा बैठक की थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित विभाग 30 जून से पहले नालों की सफाई का काम हर हाल में पूरा कर लें। साथ ही, उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि नालों से निकाली गई गाद को सड़कों पर छोड़ने के बजाय तुरंत निर्धारित डंपिंग साइट्स पर पहुंचाया जाए।
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