नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी के 3 प्रोजेक्ट में अगले महीने से रजिस्ट्री, हर सोसाइटी में 20% फ्लैट बंधक रहेगा
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े सेक्टर-150 के एससी-02 की तीन परियोजनाओं में अगले महीने से फ्लैटों की रजिस्ट्री और निर्माण शुरू करने की तैयारी है। इन तीन परियोजनाओं में एक हजार से अधिक लोग फ्लैट में रह रहे हैं। हर सोसाइटी में 20 प्रतिशत फ्लैट बंधक रखने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।

नोएडा स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े सेक्टर-150 के एससी-02 की तीन परियोजनाओं में अगले महीने से फ्लैटों की रजिस्ट्री और निर्माण शुरू करने की तैयारी है। इन तीन परियोजनाओं में एक हजार से अधिक लोग फ्लैट में रह रहे हैं। रजिस्ट्री शुरू करने से पहले हर सोसाइटी में 20 प्रतिशत फ्लैट बंधक रखने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। ये फ्लैट पूरा बकाया मिलने और खेल सुविधाएं विकसित करने तक बंधक रहेंगे।
फ्लैट बंधक बनाने की दो वजहें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गोदरेज सहित तीन परियोजनाओं को सशर्त अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। अब इन परियोजनाओं से संबंधित 20 प्रतिशत फ्लैट बंधक बनाने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि फ्लैट बंधक बनाने की दो वजह हैं। पहली, बिल्डर के जरिए पूरा बकाया मिलना और दूसरा, अपने हिस्से की खेल सुविधाएं विकसित करना। जिस दिन बिल्डर इन दोनों शर्तों को पूरा कर लेगा, प्राधिकरण 20 प्रतिशत बंधक फ्लैट बिल्डर को वापस कर देगा।
पांच साल में बकाया देना होगा
अधिकारियों का कहना है कि इन तीनों परियोजनाओं ने पूरा बकाया जमा कर दिया है, लेकिन खेल सुविधाएं विकसित नहीं हैं। गौरतलब है कि न्यायालय के आदेश के तहत जिन बिल्डरों का बकाया जमा नहीं किया है, उनके शुरुआत में कुल बकाये में से 20 प्रतिशत राशि जमा करना होगी। न्यायालय के आदेश के तहत बिल्डरों को परियोजनाओं का काम अधिकतम पांच साल में पूरा कर प्राधिकरण का बकाया देना होगा। अलग-अलग स्तर पर प्राधिकरण अपना बकाया वसूल सकेगा।
27 हजार वर्ग मीटर में भूखंड
सेक्टर-150 का एससी-02 का भूखंड 27 हजार 185 वर्ग मीटर में है। प्राधिकरण ने यह लोटस ग्रीन बिल्डर को भूखंड आवंटित किया था लेकिन उसने मुनाफा कमाने के लिए इसे आगे छोटे-छोटे 24 टुकड़ों में बेच दिया।
बंधक फ्लैटों की सूची मांगने पर कोर्ट पहुंचे
प्राधिकरण ने संबंधित तीनों परियोजनाओं के बिल्डर से बंधक बनाए जाने वाले फ्लैटों की सूची मांगी है। यह सूची डेढ़-दो महीने पहले मांगी गई थी, लेकिन अब तक बिल्डर सूची देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस मामले में बिल्डरों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अगले महीने सुनवाई होनी है।




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