जहां सिर्फ भारत के PM फहरा सकते हैं तिरंगा, पढ़िए लाल किले के ‘लाहौरी गेट’ के 5 अनसुने किस्से
क्या आपको मालूम था कि लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराने का हक केवल भारत के प्रधानमंत्री को है? पढ़िए लाल किले के लाहौरी गेट के 5 अनसुने किस्से, जो गुलामी से लेकर आजाद भारत की कहानियों को समेटे हुए हैं।

हर साल 15 अगस्त को लाल किले के लाहौरी गेट पर भारतीय आन-बान और शान के प्रतीक तिरंगा को फहराया जाता है। क्या आपको मालूम था कि लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराने का हक केवल भारत के प्रधानमंत्री को है? पढ़िए लाल किले के लाहौरी गेट के 5 अनसुने किस्से, जो गुलामी से लेकर आजाद भारत की कहानियों को समेटे हुए हैं।
'लाहौरी गेट' नाम पड़ने का किस्सा
सबसे पहला ख्याल यही आता है कि लाल किले के लाहौरी गेट के नाम में लाहौर शब्द क्यों और कहां से आया। दरअसल मुगल दौर में यहां से निकलने वाला रास्ता सीधे लाहौर को जाता था। मुगल काल में इसी रास्ते से शाही जुलूस निकलते थे और यह दरवाज़ा दिल्ली की रौनक और ताकत का प्रतीक था। इस कारण इसके नाम में लाहौर शब्द जुड़ा है। वर्तमान में लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा है।
अंग्रेजों ने यहीं फहराया अपना झंड़ा
इतिहास की पर्तों को कुरेदें तो मालूम चलता है कि गोरों ने करीब 200 साल तक भारत पर राज किया है। ब्रिटिश राज के दौरान 1857 की क्रांति घटी। इसे अंग्रेजों ने अंत में बुरी तरह कुचला। इसके बाद से अंग्रेजों ने अपना यूनियन जैक यहीं फहराया और देश को अपनी जंजीरों में जकड़े रखा। इसलिए यह जगह गुलामी की चोट के तौर पर जानी जाती है, जहां अब अपना तिरंगा शान के साथ लहराता है।
नेता जी का अधूरा सपना 1947 में पूरा हुआ
21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद सरकार बनने के बाद लाल किले पर INA का झंडा फहराने का सपना देखा गया था। ये अधूरा ही रहा। मगर आजादी की लड़ाई जारी रही और देश आजाद हुआ। इसके बाद नेता जी का अधूरा सपना साल 1947 में जाकर पूरा हुआ।
आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बने। इस तरह 15 अगस्त 1947 को लाल किले के लाहौरी गेट से पहला तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया। ये रवायत आज भी बरकरार है। आगे जानिए झंडा फहराने से जुड़ी परंपराओं के बारे में।
सिर्फ भारत के पीएम फहरा सकते तिरंगा
देश आजाद हो गया। एक दौर में जहां अंग्रेजों का झंड़ा फहरता था, वहां अब भारतीय तिरंगा शान से लहराने लगा। मगर ये तय हो गया कि लाल किले के लाहौरी गेट पर तिरंगा फहराने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री को होगा। इसमें भी सामने आया कि भारत के पीएम साल में एक बार, 15 अगस्त को ही यहां से तिरंगा फहराएंगे।
21 तोपों की सलामी आज भी बरकरार
हर साल जब तिरंगा यहां लहराता है, तो पूरे सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है, जिसे सुनकर पूरा देश गर्व से भर जाता है। आपको बता दें कि सेना के तोपखाने द्वारा विशेष समय-समय पर (15 अगस्त के अलावा भी कई मौकों पर) 21 बार फायर किया जाता है। यह फायर असली गोला नहीं बल्कि खाली (blank) गोला-बारूद होता है। इस कारण इससे केवल आवाज़ और धुआं पैदा होता है।




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