Sweets were served to Mughals, British and Nehru; Know the story of this 235 year old shop in Delhi मुगलों, अंग्रेजों और नेहरू को खिलाई मिठाई; जानिए दिल्ली की 235 साल पुरानी दुकान की कहानी, Ncr Hindi News - Hindustan
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मुगलों, अंग्रेजों और नेहरू को खिलाई मिठाई; जानिए दिल्ली की 235 साल पुरानी दुकान की कहानी

दुकान का नाम घंटेवाला हलवाई है, जिसके किस्सों का इतिहास करीब 235 साल पुराना है। इन किस्सों में मुगलों से लेकर देश को खाकर डकार जाने वाले अंग्रेजों और आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक की हिस्सेदारी शामिल है।

Thu, 7 Aug 2025 06:48 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुगलों, अंग्रेजों और नेहरू को खिलाई मिठाई; जानिए दिल्ली की 235 साल पुरानी दुकान की कहानी

देश की राजधानी दिल्ली अपने आप में लाखों किस्से-कहानियां समेटे हुए है। इन्हीं किस्सों की कड़ी में दिल्ली के चांदनी चौक की एक हलवाई की दुकान भी जुड़ी है। दुकान का नाम घंटेवाला हलवाई है, जिसके किस्सों का इतिहास करीब 235 साल पुराना है। इन किस्सों में मुगलों से लेकर देश को खाकर डकार जाने वाले अंग्रेजों और आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तक की हिस्सेदारी शामिल है।

घंटेवाला हलवाई की दुकान दिल्ली के चांदनी चौक में आज भी मौजूद है। इसे साल 1790 में लाला सुख लाल जैन नामक व्यापारी ने खोला था, जो राजस्थान से दिल्ली आए थे। करीब 235 सालों का इतिहास समेटे इस हलवाई की दुकान को देश की सबसे पुरानी मिठाई की दुकानों में से एक माना जाता है। अब एक-एक करके मुगलों, ब्रिटिशों और आजाद भारत के दौरान के किस्सों की बात करते हैं।

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मुगल बादशाह ने दुकान को दिया नाम

इतिहास की रेखाओं को बिना घुमाए पीछे से आगे करके देखें तो सबसे पहले मुगलों के दौर के किस्से सामने आते हैं। कहते हैं कि इस दुकान का नाम, 'घंटेवाला' मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने रखा था। कहानियों की माने तो ये मुगल बादशाह अपने सेवकों से कहते थे कि घंटे के पास वाली दुकान से मिठाई लाओ।

चूंकि उस दौर में इलाका इतना आबादी वाला नहीं था और दुकान के पास एक स्कूल था, जिसके घंटे की आवाज बादशाह को सुनाई देती थी। इस कारण वो अपने सेवकों से घंटे वाला दुकान या घंटे के पास वाली दुकान से मिठाई लाने को कहते थे। इस कारण इसका नाम धीरे-धीरे घंटेवाला पड़ गया।

अंग्रेजों और 1857 की क्रांति से जुड़ा किस्सा

अब मुगलों के दौर के बाद सीधें अंगेजों के दौर में आते हैं। अंग्रेजों के समय 1857 की मशहूर क्रांति हुई थी। इसने पूरे ब्रिटिश शासन को भारत में हिलाकर रख दिया था। इस विद्रोह के दौरान के अखबार 'दिहली उर्दू अखबार' का एक किस्सा बताता है कि चांदनी चौक में उस समय भी घंटेवाला की दुकान मौजूद थी, जो कि क्रांतिकारियों के बीच खासा फेमस भी थी।

अखबार में जिक्र है कि जैसे ही वे (क्रांतिकारी) चांदनी चौक का चक्कर लगाते हैं, घंटेवाला की मिठाइयों का आनंद लेते हैं। ऐसा करने से उनमें लड़ने और दुश्मन को मारने की सारी इच्छा खत्म हो जाती है।

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नेहरू और राजीव गांधी ने भी चखा स्वाद

साल दर साल दुकान और उसकी मिठाइयों की मिठास का सिलसिला यूं ही बरकरार रहा। देश आजाद हो गया। दुकान ने अपनी सुगंध और स्वाद की छाप लोगों के दिलों में बनाए रखी। आजाद भारत के कई प्रधानमंत्री भी इस दुकान की मिठाइयों का स्वाद चख चुके हैं। इनमें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक का नाम शामिल है।

2015 में बंद हुई दुकान फिर से खुली

घंटेवाला का सोहन हलवा और करांची आज भी लोगों के दिलों में घर बनाए हुए है, लेकिन साल 2015 में इस दुकान पर ताला लग गया था। उस दौरान दुकान का बंद होना एक युग का अंत होना प्रतीत हो रहा था। हालांकि इसे 2024 में फिर से खोल दिया गया है। घंटेवाला के मालिक सुशांत जैन ने ‘पीटीआई-भाषा ’को बताया था कि जब हमें 2015 में दुकान बंद करनी पड़ी तो मेरा पूरा परिवार बेहद दुखी था। कई ग्राहक हमारे पास आकर शिकायत करते थे कि अब हम ऐसी मिठाइयां कहां खाएंगे, खासकर हमारा पसंदीदा सोहन हलवा?

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