राघव चड्ढा ने जो कहा था वही कर दिखाया, सैलाब वाली वह बात तो सच निकली
राघव चड्ढा ने 21 दिन पहले ही पार्टी में आने वाले इस 'सैलाब' का संकेत दे दिया था, जिसे कोई समझ नहीं पाया या फिर किसी दरकिनार गए नेता की गुस्से में दी गई प्रतिक्रिया भर सोचकर नजरअंदाज किया गया।

आम आदमी पार्टी और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को जितना बड़ा झटका लगा उसकी कल्पना संभवत: किसी ने नहीं की थी। हालांकि, राघव चड्ढा ने 21 दिन पहले ही पार्टी में आने वाले इस 'सैलाब' का संकेत दे दिया था, जिसे कोई समझ नहीं पाया या फिर किसी दरकिनार गए नेता की गुस्से में दी गई प्रतिक्रिया भर सोचकर नजरअंदाज किया गया। राघव चड्ढा ने वक्त आने पर सैलाब लाने की चेतावनी उसके अगले दिन ही दे दी थी जब उन्हें डिप्टी लीडर के पद से हटाते हुए राज्यसभा में उनके बोलने पर रोक लगा दी गई थी।
आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच खटास तो लंबे समय से थी लेकिन बात गुपचुप ही थी। अरविंद केजरीवाल की कथित शराब घोटाले में गिरफ्तारी से लेकर ट्रायल कोर्ट से मिली राहत तक पर राघव चड्ढा की चुप्पी पार्टी को असहज कर रही थी। महीनों तक बर्दाश्त करने के बाद 'आप' ने 2 अप्रैल को अचानक राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया और सभापति से यह भी मांग की कि उन्हें 'आप' की तरफ से बोलने के समय ना दिया जाए। राघव चड्ढा ने इसका जवाब 3 अप्रैल को दिया तो पूछा कि क्या उनका कसूर यह था कि वह आम लोगों की आवाज उठा रहे थे।
राघव चड्ढा ने 3 अप्रैल को कही थी ‘सैलाब’ लाने की बात
संसद भवन के बाहर खड़े होकर राघव चड्ढा ने बताया कि वह कैसे पार्टी के इस कदम से आहत और हैरान हैं। उन्होंने अपना कसूर पूछते हुए बताया कि किस तरह वह आम लोगों की आवाज उठाने की कोशिश कर रहे थे और पार्टी ने उन्हें खामोश कर दिया। राघव ने अपनी बात को समाप्त करने से पहले पार्टी को एक चेतावनी दी थी, या यूं कहें कि शुक्रवार को जो कुछ हुआ उसकी ओर इशारा कर दिया था। राघव ने कहा था, ‘जिन लोगों ने संसद में मेरे बोलने का अधिकार छीन लिया, मुझे खामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं- मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना... मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना...मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।’
सैलाब की चेतावनी और ले आए सुनामी
राघव चड्ढा ने उस दिन जिस सैलाब की बात कही थी वह असल में सुनामी बनकर सामने आया। इसे आम आदमी पार्टी के डेढ़ दशक के इतिहास में अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, जब पार्टी के तो तिहाई से ज्यादा सांसदों (10 में से 7) ने अलग गुट बनाया और उसका भाजपा में विलय कर दिया। केजरीवाल के लिए इसलिए भी यह झटका बहुत बड़ा है क्योंकि 22 दिन पहले ही उन्होंने चड्ढा को हटाकर जिस अशोक कुमार मित्तल को डिप्टी लीडर का पद दिया था, वह भी भरोसा तोड़ गए। इतना ही नहीं पार्टी के संगठन महासचिव और इन दिनों पार्टी सुप्रीमो के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक ने भी साथ छोड़ दिया।




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