बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, UP सरकार ने बदली नीति, गाजियाबाद के 1.75 लाख प्रीपेड मीटर फिर होंगे पोस्टपेड
बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर है। यूपी सरकार ने प्रीपेड मीटर की अनिवार्य व्यवस्था को खत्म कर दिया है, जिससे गाजियाबाद के पौने दो लाख उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। जिले में कुल 11 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं।

स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर से परेशान उपभोक्ताओं को यूपी सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने प्रीपेड मीटर की व्यवस्था अब खत्म कर दी है। इससे गाजियाबाद जिले के करीब पौने दो लाख स्मार्ट मीटर प्रीपेड से पोस्टपेड में बदले जाएंगे।
गाजियाबाद जिले में करीब 11 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। घरेलू कनेक्शनों पर करीब डेढ़ साल से प्रीपेड मीटर लगाने का काम चल रहा था। बीते लगभग छह महीने से स्मार्ट मीटर स्वतः प्रीपेड मोड में परिवर्तित होने शुरू हो गए थे। जिले में अभी तक सवा दो लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से पौने दो लाख प्रीपेड मोड में फिलहाल चल रहे हैं। पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में मीटर के होने से उपभोक्ताओं के घर की बिजली गुल हो रही थी।
उपभोक्ताओं की समस्या थी कि उनके पास इस संबंध में कोई पूर्व सूचना नहीं मिली थी। पोस्टपेड व्यवस्था से जो भी बिल बना था, प्रीपेड होते ही वह नेगेटिव बैलेंस में चला गया और बिजली गुल हो गई। इसके बाद भी उपभोक्ता मीटर को रिचार्ज नहीं कर पा रहे थे। रिचार्ज होने के बाद भी लोगों के घरों की आपूर्ति सुचारू नहीं हो पा रही थी। इसी कारण जिले में विभिन्न कॉलोनियों से लेकर विद्युत उपकेंद्र, हाईवे और कलक्ट्रेट तक अक्सर प्रदर्शन चल रहे थे।
सॉफ्टवेयर की भी रही समस्या
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाली कुसुमा ने बताया कि मीटर प्रीपेड मोड में गया तो उनके कनेक्शन पर एक पुरुष का नाम दिखने लगा। हेल्पलाइन पर कॉल की तो समस्या का समाधान करना तो दूर, सही जवाब तक नहीं मिला। विशेषज्ञों का आरोप है कि पूरी तैयारी के बिना ही 80 फीसदी तक ऑफलाइन चल रही व्यवस्था को ऑनलाइन मोड में बदल दिया गया। स्मार्ट मीटर प्रीपेड मोड में जाने शुरू हुए तो तीन-तीन दिन तक लोगों के घरों में अंधेरा रहा। परेशान लोग सड़कों पर उतरे और प्रदर्शन किया। व्यवस्था में खामी और समस्या का त्वरित समाधान न कर पाने के चलते उपभोक्ता लगातार परेशान हो रहे हैं।
अधिकारी भी नहीं दे पा रहे थे जवाब
स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली चोरी रोकते हुए प्रीपेड व्यवस्था लागू करने में कई स्तर पर खामियां रहीं। उपभोक्ताओं के आरोपों को लेकर अधिकारियों के पास भी जवाब नहीं थे। लोनी में रहने वाले नरेश का परिवार पांच सप्ताह से अधिक समय तक अंधेरे में रहा। कंपनी के कर्मचारी ने उनके कनेक्शन में पड़ोसी के मीटर की संख्या अपडेट कर दी थी। दो हजार का रिचार्ज कराया तो पड़ोसी का मीटर रिचार्ज हो गया। उनका मीटर प्रीपेड मोड में जाने के बाद से ही बिजली की आपूर्ति गुल रही।
बृजेश सिंह, मुख्य अभियंता, जोन 3, विद्युत निगम, ''स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में नहीं बदला जा रहा है। प्रीपेड से पोस्टपेड मोड में करने के निर्देश मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।''




साइन इन