टायरों को चिपकाता था लेकिन देश को 'पंक्चर' करना चाहता था पाकिस्तान का जासूस नौशाद
बिहार के मुजफ्फरपुर का निवासी नौशाद अली फरीदाबाद में पंक्चर की दुकान की आड़ में पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था। गाजियाबाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। यह गिरोह महिलाओं और नाबालिगों के जरिए सैन्य ठिकानों की रेकी और वीडियो भेजने का काम करता था।

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़ा गया नौशाद अली टायरों पर चिप्पियां साटने का काम करता था लेकिन उसकी मंशा देश को पंचर करने की थी। वह पिछले तीन महीने से ग्रेटर फरीदाबाद के नचौली इलाके में पेट्रोल पंप पर पंक्चर की दुकान चला रहा था। यहां वह तीन महीने पहले ही कोलकाता से किसी संपर्क के जरिए आया था। नौशाद अली मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के थाना काटी के अंतर्गत हरचंदा गांव का रहने वाला है।
शुरुआत में क्या बोली थी पुलिस?
बताया जाता है कि 16 मार्च को गाजियाबाद पुलिस की टीम आरोपी को काबू करने के लिए पेट्रोल पंप पर आई थी। जब पुलिस ने उसे हिरासत में लिया तो उसके सहकर्मियों के होश उड़ गए थे। पुलिसकर्मियों ने पंप पर कर्मचारियों को इतना बताया कि वे हेडक्वार्टर से आए हैं। इसके बाद वे उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर चले गए थे।
जासूस होने की बात जान कर्मचारियों के उड़ गए थे होश
बाद में पता चला कि उसे जासूसी मामले में पकड़ा है तो उसके साथ पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों के होश उड़ गए। पंप पर काम करने वाले संतोष ने बताया कि करीब तीन महीने पहले यहां पंक्चर वाले की जरूरत थी।
16 मार्च को पंप पर आई थी पुलिस
पंप कर्मियों ने बताया कि जब पुलिस की टीम 16 मार्च को आरोपी को दबोचने के लिए पेट्रोल पंप पर आई थी तो वह पंप पर ही मौजूद था। पुलिस ने यहां कर्मचारियों का ब्यौरा जुटाया। सभी के मोबाइल नंबर और नाम पूछे।
सीधे पंक्चर लगाने वाले नौशाद अली को दबोचा
इसके बाद पुलिस पेट्रोल पंप के आस-पास तलाश करती रही। बताया जाता है कि कुछ समय बाद पुलिस फिर से पेट्रोल पंप पर आई और सीधे पंक्चर लगाने वाले नौशाद अली को दबोच लिया। इसके बाद चार्जिंग पर लगे उसके मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया था। पंप कर्मियों ने बताया कि पुलिस के पास नौशाद का सिर्फ आधार कार्ड था, लेकिन पुलिस के पास उसका फोटो या कोई और दस्तावेज नहीं था। आधार कार्ड में फोटो साफ नहीं था।
महिलाओं और नाबालिगों से कराई जाती थी रेकी
पूछताछ में सामने आया कि सरफराज अपने नेटवर्क को बचाने के लिए महिलाओं और नाबालिगों का इस्तेमाल करता था। इन्हें कम संदेह के चलते संवेदनशील स्थानों पर भेजा जाता था। पकड़े गए नाबालिग आरोपी ने कबूल किया कि उसे सोनीपत और दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रेकी के लिए भेजा गया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह सोनीपत रेलवे स्टेशन पर कैमरे लगाने के दौरान मौके पर मौजूद था।
बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
अलग-अलग तारीख पर ऐसे हुई गिरफ्तारी
कौशांबी थाना पुलिस ने 14 मार्च को एक महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। सभी पाकिस्तान से चल रहे व्हाट्सऐप ग्रुप में सैन्य ठिकानों के वीडियो और लोकेशन भेज रहे थे। आरोपियों ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सोलर आईपी बेस्ड कैमरे भी लगाए थे। 20 मार्च को पांच नाबालिग समेत नौ आरोपी और फिर अब 22 मार्च को तीन आरोपी पकड़े गए हैं।




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