नोएडा मजदूर हिंसा केस में DU ग्रेजुएट और पूर्व पत्रकार पर लगा NSA, पिता बोले- मेरी बेटी ‘आज की भगत सिंह’
पुलिस का दावा है कि दोनों ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नामक संगठन के सक्रिय सदस्य हैं और इन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि परिवारों और वकीलों का कहना है कि यह कार्रवाई विचारधारा को निशाना बनाकर की जा रही है।

नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूर प्रदर्शन और उसके बाद भड़की हिंसा का मामला अब और गंभीर हो गया है। घटना के ठीक एक महीने बाद पुलिस ने दो आरोपियों, दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री ग्रेजुएट आकृति चौधरी और पूर्व पत्रकार सत्याम वर्मा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया है। पुलिस का दावा है कि दोनों ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नामक संगठन के सक्रिय सदस्य हैं और इन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और अव्यवस्था फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि परिवारों और वकीलों का कहना है कि यह कार्रवाई विचारधारा को निशाना बनाकर की जा रही है।
1200 हिरासत में लिये गए, 60 अब तक जेल में
13 अप्रैल को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 15 FIR दर्ज कीं। सैकड़ों लोगों को आरोपी बनाया गया और करीब 1200 लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में अधिकांश को छोड़ दिया गया, लेकिन करीब 60 लोग अब भी जेल में हैं। इन पर दंगा, हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
आकृति और सत्याम पर NSA क्यों लगाया गया
पुलिस का कहना है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि बाहरी लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से कराई गई। गौतमबुद्ध नगर पुलिस के अनुसार कुछ संगठनों के लोग मजदूरों को भड़काकर कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी आधार पर आकृति चौधरी और पत्रकार सत्याम वर्मा पर NSA लगाया गया है।
पिता बोले- बाद की हिंसा के लिए जिम्मेदार कैसे ठहरा सकते
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आकृति चौधरी पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएट हैं। उनके पिता अरुण चौधरी वामपंथी अखबार ‘गणशक्ति’ से जुड़े हैं। परिवार का कहना है कि आकृति को 11 अप्रैल को ही नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से उठा लिया गया था, जबकि हिंसा 13 अप्रैल को हुई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दो दिन पहले हिरासत में ली गई लड़की को बाद की हिंसा के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
पिता ने बेटी को बताया- आज की भगत सिंह
आकृति के पिता ने कहा कि अगर मजदूरों के हक की आवाज उठाना अपराध है तो उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। उन्होंने उसे “आज की भगत सिंह” तक बता दिया। पुलिस ने आकृति के अलावा अमेठी की शोध छात्रा सृष्टि गुप्ता और बिहार के रूपेश रॉय को भी गिरफ्तार किया है। वकीलों का कहना है कि ये लोग सिर्फ मजदूरों के समर्थन में भाषण और नुक्कड़ नाटक कर रहे थे।
सत्याम ने 15 सालों तक पत्रकारिता की
इसी मामले में लखनऊ के पूर्व पत्रकार सत्याम वर्मा पर भी NSA लगाया गया है। उनके परिचितों के मुताबिक सत्याम ने 15 साल तक पत्रकारिता की है और भगत सिंह पर किताबों का संपादन किया है। वहीं NIT जमशेदपुर से पढ़े आदित्य आनंद, हंसराज कॉलेज के पोस्टग्रेजुएट हिमांशु ठाकुर और कई अन्य युवाओं को भी गिरफ्तार किया गया है। परिवारों का कहना है कि ये लोग सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय थे और मजदूरों के समर्थन में खड़े हुए थे।
पुलिस ने बताई- संगठित हिंसा, परिवार बोला- आवाज दबाई जा रही
अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक और वैचारिक बहस का रूप ले लिया है। एक तरफ पुलिस इसे कानून व्यवस्था और संगठित हिंसा का मामला बता रही है, तो दूसरी तरफ परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता इसे असहमति की आवाज दबाने की कार्रवाई कह रहे हैं। फिलहाल अदालत में कई आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है और मामले की जांच जारी है।




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