अथॉरिटी ने हटवाए थे ‘बैरिकेड’, नोएडा इंजीनियर मौत मामले में डेवलपर का अदालत में खुलासा
नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में डेवलपर ने अदालत में दावा किया है कि नोएडा अथॉरिटी ने ही अवैध विज्ञापन हटाने के नाम पर वहां लगी बैरिकेडिंग को हटवा दिया था। कंपनी की ओर से और भी कई खुलासे किए गए हैं।

कनोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर की मौत के मामले में प्लाट मालिक यानी डेवलपर ने अदालत में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। डेवलपर ने अदालत में दावा किया है कि नोएडा अथॉरिटी ने ही अवैध विज्ञापन हटाने के नाम पर वहां लगी बैरिकेडिंग हटवा दी थी। यही नहीं अथॉरिटी ने भारी जुर्माना भी लगा दिया था। कंपनी का दावा है कि उसकी ओर से पहले ही अथॉरिटी को जलभराव और मिट्टी धंसने जैसी सुरक्षा खतरों के बारे में लिखित चेतावनी दी गई थी लेकिन इस पर ध्यान ही नहीं दिया गया।
नोएडा अथॉरिटी ने बैरिकेड हटाने को कहा था
एक अधिकारी ने बताया कि इंजीनियर की मौत वाले प्लॉट के मालिक ने ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में दावा किया है कि साइट पर पहले बैरिकेडिंग की गई थी लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने जुलाई 2021 में विज्ञापन वाले बैरिकेड हटाने के लिए कहा था। अथॉरिटी ने कथित तौर पर अवैध विज्ञापन के लिए छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। ये डिटेल्स मंगलवार को अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान रखे गए।
गिरफ्तार लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज
अदालत ने मामले में गिरफ्तार लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं और उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। अदालत में गुरुवार को भी सुनवाई होगी। डेवलपर ने अदालत को बताया कि जनवरी 2021 में सेक्टर 150 में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट पर लगाए गए बैन के बाद बैरिकेड हटाए गए थे। डेवलपर के वकील ने कहा कि जुलाई 2021 से पहले प्लॉट पर बैरिकेडिंग की गई थी लेकिन अथॉरिटी ने कंपनी को अपने 'अर्थम' प्रोजेक्ट के विज्ञापन वाले बैरिकेड हटाने का निर्देश दिया था।
सुरक्षा जोखिमों के बारे में किया था आगाह
डेवलपर ने यह भी दावा किया कि उसने जानलेवा दुर्घटना से काफी पहले नोएडा अथॉरिटी को सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं के बारे में बताया था। अदालत में दिए गए बयान में दावा किया गया है कि विजटाउन ने 14 मार्च, 2022 को नोएडा अथॉरिटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को पत्र लिखा था। इसमें चेतावनी दी थी कि अथॉरिटी के सीवर और मुख्य नाली लाइनों के ढहने से उसके प्लॉट में लगातार सीवेज और नाली का पानी बह रहा है। इससे बेसमेंट में पानी भर गया है और गंभीर दुर्घटना का खतरा पैदा हो गया है।
अधिकारी का दावा, सुरक्षा से समझौता करने को नहीं कहा
अदालत में दावा किया गया है कि दुर्घटना को रोकने के लिए जमा पानी को बाहर निकालने का आग्रह किया था। वहीं नोएडा अथॉरिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि अर्थम प्रोजेक्ट के खिलाफ कार्रवाई केवल अवैध विज्ञापनों को रोकने तक सीमित थी। नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी ने दावा किया कि अथॉरिटी ने कभी भी डेवलपर से सुरक्षा उपायों से समझौता करने के लिए नहीं कहा था। मौके पर बिना विज्ञापनों वाले सादे बैरिकेड भी लगाए जा सकते थे।
सिंचाई विभाग ने भी ड्रेनेज पर कही थी यह बात
गौरतलब यह भी कि इस मामले में पहले यह बात भी सामने आई थी कि यूपी सिंचाई विभाग ने भी सेक्टर 150 में जमा बारिश के पानी और ड्रेनेज को हिंडन नदी में निकालने के लिए हेड रेगुलेटर बनाने की जरूरत बताई थी। बता दें कि ग्रेटर नोएडा स्थित नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के सेक्टर-150 के पास 16 और 17 जनवरी की दरमियानी रात को सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार इस प्लाट में भरे पानी में समा गई थी। हादसे में युवराज मेहता को बचाया नहीं जा सका था।




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