आतिशी पर एक और आरोप; विधानसभा सचिवालय का नोटिस, 6 फरवरी तक मांगा जवाब
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विपक्ष की नेता आतिशी को 6 फरवरी तक एक नए मामले में लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यह मामला कथित गलत बयानबाजी का है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विपक्ष की नेता आतिशी से इस महीने की शुरुआत में शीतकालीन सत्र के दौरान AAP विधायकों के निलंबन के बारे में उनके कथित गलत और दुर्भावनापूर्ण बयानों के संबंध में 6 फरवरी तक लिखित जवाब देने को कहा है। यह मामला उनके उस कथित भ्रामक बयान से जुड़ा है जो उन्होंने विंटर सेशन के दौरान AAP विधायकों के सस्पेंशन पर दिया था।
6 फरवरी तक मांगा लिखित जवाब
दिल्ली विधानसभा ने बुधवार को विपक्ष की नेता आतिशी से कहा कि वह इस महीने की शुरुआत में विंटर सेशन के दौरान AAP विधायकों के निलंबन के बारे में उनके कथित गलत और दुर्भावनापूर्ण बयानों के संबंध में विशेषाधिकार समिति को एक लिखित जवाब दें। आतिशी से 6 फरवरी तक अपना लिखित जवाब देने को कहा गया है। विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी के कथित गलतबयानी के मामले को सदन की विशेधिकार समिति के पास भेजा था।
आतिशी को जारी किया लेटर
दिल्ली विधानसभा सचिवालय की ओर से आतिशी को जारी किए गए लेटर में कहा गया है कि मुझे विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष की ओर से आपसे गुजारिश करने को कहा गया है कि आप इस मामले में अपना लिखित जवाब 6 फरवरी तक सचिवालय में जमा करें।
कार्यवाही में बाधा डालने के लिए लिया था ऐक्शन
AAP के मुख्य सचेतक संजीव झा समेत चार AAP विधायकों को 6 जनवरी को शीतकालीन सत्र के दौरान उपराज्यपाल के भाषण में बाधा डालने के लिए बाहर निकाल दिया गया था। बाद में इन विधायकों को सदन की बाकी बैठकों से सस्पेंड करने को कहा गया था। स्पीकर ने आतिशी के उस बयान को विशेधिकार समिति को भेजा था जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि विधायकों को पलूशन के विरोध में मास्क पहनने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।
विपक्ष की नेता ने की गलत बयानी
विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी के दावे का खंडन करते हुए कहा था कि विपक्ष की नेता का आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनकी ओर से सदन और लोगों को गुमराह करने की जानबूझकर कोशिक की गई थी। स्पीकर ने साफ कर दिया था कि चार AAP विधायक संजीव झा, सोम दत्त, कुलदीप कुमार और जरनैल सिंह को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए सस्पेंड किया गया था ना कि मास्क पहनने के लिए। यह कार्रवाई विधानसभा की व्यवस्था और गरिमा को बनाए रखने के लिए की गई थी।




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