ajit pawar plane crash copilot shambhavi neighbors and grandmother share memories विदेश में ट्रेनिंग, स्वभाव से चुलबुली; कैसी थीं को-पायलट शांभवी? पड़ोसी और दादी बताया, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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विदेश में ट्रेनिंग, स्वभाव से चुलबुली; कैसी थीं को-पायलट शांभवी? पड़ोसी और दादी बताया

अजीत पवार को ले जा रहे विमान के क्रैश होने से उनमें सवार सभी लोगों की मृत्यु हो गई। मृतकों में को-पायलट शांभवी पाठक भी शामिल थीं जिन्होंने उड़ान भरने से पहले अपनी दादी को आखिरी बार गुड मॉर्निंग मैसेज भेजा था। कैसी थीं शांभवी उनकी दादी और पड़ोसी की जुबानी…

Wed, 28 Jan 2026 08:43 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, ग्वालियर
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विदेश में ट्रेनिंग, स्वभाव से चुलबुली; कैसी थीं को-पायलट शांभवी? पड़ोसी और दादी बताया

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन बुधवार की सुबह बारामती के पास क्रैश हो गया। हादसे में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। विमान को उड़ा रही पायलट शांभवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली थी। शांभवी एक वायुसेना अधिकारी की बेटी थीं। शांभवी को बचपन से उड़ानों में दिलचस्पी थी। शांभवी की दादी ग्वालियर में रहती हैं। जानें उन्होंने शांभवी को लेकर क्या बातें कही।

न्यूजीलैंड से ली थी कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग

ग्वालियर के बसंत विहार में रहने वाली शांभवी (25) की दादी मीरा पाठक ने कहा कि उनकी पोती बेहद होशियार थी। शांभवी ने कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग न्यूजीलैंड से ली थी। उसने ब्रिटेन और रूस समेत कई देशों के लिए उड़ानों का संचालन किया था। मुंबई में विमान में सवार होने से पहले शांभवी ने बुधवार की सुबह अपनी दादी को ग्वालियर में ‘गुड मॉर्निंग’ का मैसेज भेजा था।

सुबह किया था दादी को मैसेज

दादी मीरा पाठक ने बताया कि सुबह शांभवी का मैसेज 'गुड मॉर्निंग दद्दा' देखकर मैं हैरत में पड़ गई। ऐसा इसलिए क्योंकि शांभवी नियमित मैसेज नहीं भेजती थी। एक दिन पहले मैंने शांभवी के पिता से बात की थी। उन्होंने बताया था कि चीनी (प्यार से बुलाने का नाम) एक प्लाइट के संबंध में मुंबई गई है। आज सुबह करीब 11 बजे मेरे छोटे बेटे का फोन आया। उसने बताया कि जिस विमान दुर्घटना में अजित पवार की मौत हुई है उसमें शांभवी भी थी। इसके बाद मैं घबरा गई।

दिल्ली के एयर फोर्स स्कूल से पढ़ाई

मीरा पाठक ने कहा कि शांभवी के पिता विक्रम पाठक वायुसेना में पायलट थे और अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जब विक्रम ग्वालियर के एयरफोर्स स्टेशन में तैनात थे तब शांभवी ने एयरफोर्स विद्या भारती स्कूल से पांचवी पास की थी। बाद में विक्रम का तबादला हो गया तो परिवार दिल्ली चला गया। बेटा विक्रम परिवार के साथ लोधी कॉलोनी में रहने लगा। पांचवीं के बाद शांभवी ने दिल्ली एयर फोर्स के स्कूल बाल भारती से शिक्षा ली।

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स्वभाव में चुलबुली, बेहद होशियार

मीरा पाठक की पड़ोसी ऊषा उनियाल बताती हैं कि शांभवी पढ़ने लिखने में बेहद होशियार और स्वभाव में थोड़ी चुलबुली थी। वह कभी भी ग्वालियर आती तो अपनी दादी से मिलने का कोई मौका नहीं छोड़ती थी। एक अन्य पड़ोसी ने बताया कि शांभवी 2024 में अपने दादा की मृत्यु और साल 2025 में 12 अक्टूबर को उनकी बरसी पर ग्वालियर आई थी।

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