नोएडा हिंसा पर श्रम विभाग का हंटर; 200 ठेकेदारों पर 1.16 करोड़ का जुर्माना, लाइसेंस रद्द कर होंगे ब्लैकलिस्ट
नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन मामले में श्रम विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने 24 फैक्ट्रियों से जुड़े 203 ठेकेदारों पर कुल 1 करोड़ 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इन सभी ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द करने और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के मामले में श्रम विभाग ने 24 फैक्टरी के 200 से अधिक ठेकेदारों पर एक करोड़ 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही, उनका लाइसेंस रद्द करने के साथ ब्लैकलिस्ट करने की भी तैयारी है।
अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि श्रमिकों के आंदोलन के दौरान 203 ठेकेदारों की भूमिका संदिग्ध मिली। उन्होंने श्रम कानूनों का उल्लंघन करने के साथ श्रमिकों को उनके हितों से वंचित रखा। श्रम विभाग ने श्रमिकों के भुगतान के लिए इन ठेकेदारों को जुर्माना देने के नोटिस भेजे हैं। जुर्माना लगाने के साथ उनके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हिंसा भड़काने में कुछ अन्य ठेकेदारों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस और प्रशासन उन्हें भी चिह्नित करने में जुटा है। उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी। श्रमिकों को समय पर और नियमानुसार भुगतान न करने तथा जुर्माना अदा न करने पर ठेकेदारों के खिलाफ न्यायालय में वाद भी दायर कराया जाएगा।
पीएफ, ईएसआई समेत कई सुविधाएं
श्रमिकों को बढ़े वेतन के साथ ईपीएफओ एवं ईएसआई के अलावा अन्य लाभ भी मिलेंगे। इनमें कोई कटौती नहीं होगी। यदि कर्मचारियों के वेतन से पीएफ एवं ईएसआई के अलावा कोई कटौती की जाती है तो श्रम अधिनियमों के अंतर्गत कार्रवाई होगी। ओवरटाइम का दोगुनी दर से भुगतान, बोनस और ग्रेच्युटी का भुगतान भी किया जाएगा।
प्रशासन के प्रयास तेज
जिला प्रशासन श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखकर उद्यमी संगठनों के साथ बैठक कर नियमों के पालन के निर्देश दे रहा है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शुक्रवार को भी उद्यमी संगठनों के साथ बैठक की। उद्यमी संगठनों ने बताया कि श्रमिकों को बढ़ा वेतन देना शुरू कर दिया गया है। साथ ही, संगठनों ने औद्योगिकी इकाइयों से व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से संदेश, ऑडियो और वीडियो भेजकर शासन की गाइडलाइंस तथा न्यूनतम वेतन वृद्धि के अनुपालन को सुनिश्चित करने की अपील की है।
हालात सामान्य, 80% श्रमिक काम पर लौटे
श्रमिक आंदोलन के बाद शुक्रवार को जिले में हालात सामान्य रहे। उद्यमियों के अनुसार, 80 प्रतिशत श्रमिक काम पर लौट आए हैं। दूसरी ओर, सेक्टर-8 की कंपनी में काम करने वाली महिलाएं सड़क पर आ गईं, लेकिन पुलिस के समझाने पर चली गईं। एनईए के उपाध्यक्ष और फेज-2 में औद्योगिक इकाई चलाने वाले मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस की सुरक्षा बढ़ने से औद्योगिक सेक्टर में शांति है। 80 प्रतिशत से अधिक श्रमिक इकाइयों में काम पर आ रहे हैं। कुछ श्रमिक गांव चले गए थे, उन्हें फोन करके बुलाया जा रहा है। नोएडा अपैरल पार्क कलस्टर के ललित ठुकराल ने बताया कि अब औद्योगिक सेक्टर में स्थिति सामान्य है। हर संदिग्ध पर नजर रखी जाने लगी। जिन कंपनियों और फैक्टरियों में बीते दिनों तोड़फोड़ हुई थी वहां पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। थानों में बनी वीडियो वॉल से क्षेत्र के हर हिस्से में नजर रखी गई। जिन कंपनियों के बाहर प्रदर्शन हुआ था ज्यादातर में शुक्रवार को श्रमिक काम करते मिले।
हिंसा के लिए विदेशी फंडिंग की जांच शुरू
जिले में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब इस पूरे मामले में विदेशी फंडिंग की आशंका भी जताई जा रही। नोएडा पुलिस ने इस दिशा में पर भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया के जरिये श्रमिकों को उकसाने की कोशिश की गई। कुछ संदिग्ध हैंडल की पहचान हुई है, जिनका संचालन पाकिस्तान से होने की बात सामने आई। अब यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन गतिविधियों के पीछे किसी तरह की विदेशी फंडिंग भी शामिल है, जिससे प्रदर्शन को हिंसक रूप दिया गया। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसी संगठन से जुड़े लोगों ने पूरे प्रकरण में बाहरी निर्देशों पर काम तो नहीं किया। एटीएस भी मामले की जांच में जुट गई है। हिंदू नाम से पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे ‘एक्स’ अकाउंट अनुषी तिवारी प्राउड इंडियन नबी और मीर इलयास आइएनसी हैंडल के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। ‘एक्स’ की रिपोर्ट आने के बाद यह भी देखा जा रहा है कि आखिर हिंसा को भड़काने के पीछे क्या रणनीति थी और इसमें कौन-कौन शामिल है। विशेष संगठन से जुड़े रुपेश रॉय की गिरफ्तारी के बाद अब उसके साथियों आकृति और सृष्टि समेत अन्य लोगों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है।




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