कैसे बिहार से आकर एक ऑटो चालक ने नोएडा में लगा दी 'सैलरी वाली आग', पाकिस्तान-नेपाल कनेक्शन भी
नोएडा में वेतन की मांग को लेकर हुए आंदोलन के पीछे पुलिस ने साजिश का खुलासा किया है। पुलिस ने साजिशकर्ताओं में शामिल तीन में से दो लोगों को गिरफ्तार

नोएडा श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की जो घटनाएं हुईं, उसकी भूमिका नोएडा एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद तैयार हुई। विशेष संगठन से जुड़े तीनों साजिशकर्ता रूपेश रॉय, आदित्य आनंद और मनीषा चौहान 31 मार्च और एक अप्रैल को नोएडा आए और आंदोलन की साजिश शुरू हुई। रूपेश रॉय बिहार का एक ऑटो चालक है और जिस तरह उसने इतनी बड़ी साजिश रची वह बेहद चौंकाना वाला है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, हरियाणा सरकार श्रमिकों के वेतन में इजाफा करने वाली है, इसकी जानकारी रूपेश और उसके साथियों को थी। नोएडा के श्रमिकों को इसके बारे में कैसे उकसाया जाए, इसके लिए तीनों ने 28 मार्च के बाद की तारीख चुनी, क्योंकि इस दिन नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन होना था। जिले में सुरक्षा व्यवस्था उस समय अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा सख्त थी। तीनों 31 मार्च को शहर पहुंचे। रूपेश रॉय ऑटो चालक है और मूलरूप से छपरा का रहने वाला है। मनीषा गोपालगंज की है। विभिन्न राज्यों में हुए विरोध-प्रदर्शनों की कई तस्वीरों की जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के जरिए नोएडा पुलिस ने रूपेश रॉय, आनंद और चौहान को ट्रैक किया।
आनंद ने हिंसा के पहले अपने बालों को छोटा करवा लिया था। इनकी भूमिका दिल्ली, हैदराबाद और हरियाणा के मानेसर सहित कई जगहों के प्रदर्शनों में पाई गई। तीनों ने 9 और 10 अप्रैल को हरियाणा की कंपनियों के वॉट्सऐप ग्रुप्स से डाटा जुटाकर नोएडा के फैक्टरी कर्मचारियों के वॉट्सऐप ग्रुप बनाए, जिनमें क्यूआर कोड भेजे गए। हर ग्रुप में एक हजार से अधिक सदस्य थे। इन समूहों के जरिए कर्मचारियों को अपनी मांगें मनवाने के लिए सड़कों को जाम करने के लिए उकसाया गया।
आरोपियों ने 10 अप्रैल की रात दो बजे तीन ग्रुप बनाए, जिनमें लोगों को प्रदर्शन करने और स्थानों की जानकारी दी गई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 11 अप्रैल को जब कर्मचारियों की मांगें संबंधित विभाग के साथ बैठक के बाद काफी हद तक पूरी हो गई थीं, तब इन लोगों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए। इन भाषणों के वीडियो भी पुलिस को मिले हैं। रॉय और मनीषा को 11 अप्रैल की देर रात नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि आनंद फरार है। मनीषा समेत तीनों ग्रुप के एडमिन थे और 13 अप्रैल को सक्रिय हुए। हिंसा वाले दिन उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए निर्देश दिए।
नेपाल का एंगल भी सामने आया
पाकिस्तान के बाद मामले में अब नेपाल एंगल भी सामने आ रहा है। पुलिस इस तथ्य के तह में जाकर जल्द ही विस्तृत जानकारी देने की बात कह रही है। इसके साथ ही शहरी नक्सल की मामले में संलिप्तता से भी जिले की पुलिस इनकार नहीं कर रही है। पुलिस का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि देश में जब नक्सलवाद की कमर टूट रही है तो उस विचारधारा से जुड़े लोग उन शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हों, जहां पर भारी संख्या में औद्योगिक गतिविधियां हैं। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस लगातार श्रमिक संगठनों से जुड़े लोगों से वार्ता कर रही है।
भारत में ही बने थे एक्स खाते
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 13 अप्रैल को जब स्थिति को किसी तरह नियंत्रित किया गया, तब दो सोशल मीडिया (एक्स) खातों से भ्रामक पोस्ट किए। एक एक्स खाते से लिखा था ‘6 की मौत और 67 घायल’, जबकि दूसरे खाते से पोस्ट किया गया था ‘नोएडा विरोध के दौरान पुलिस फायरिंग में 14 की मौत और 32 घायल’ बताया गया। ये पोस्ट प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों के पास भी मिले। पुलिस द्वारा जब एक्स से इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांगा गया, तो पता चला कि दोनों अकाउंट भारत में बनाए गए थे, लेकिन पिछले तीन महीनों से पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। इन्हें चलाने में वीपीएन का भी गलत इस्तेमाल हुआ।
रिपोर्ट- रवि प्रकाश सिंह रैकवार




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