दिल्ली-NCR के पहले बैरियर मुक्त टोल प्लाजा का उद्घाटन, अब पेमेंट करने के लिए नहीं रोकनी होगी गाड़ी; गडकरी ने बताए फायदे
गडकरी के अनुसार, ‘यह डिजिटल राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो यात्रा दक्षता को बढ़ाता है, भीड़भाड़ को कम करता है, ईंधन दक्षता में सुधार करता है और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाता है।’

दिल्ली में आने-जाने वाले लोगों को एक बड़ी सौगात देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने यहां के एक टोल प्लाजा पर राष्ट्रीय राजधानी के पहले 'मल्टी-लेन फ्री फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम की शुरुआत कर दी है। जिसके बाद अब यहां से गुजरने वाले लोगों को टोल चुकाने के लिए किसी बैरियर के सामने अपने वाहन को नहीं रोकना होगा। दरअसल ऐसा इसलिए होगा क्योंकि यह टोल प्लाजा पूरी तरह से बैरियर फ्री होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को दिल्ली के मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा (UER-II) पर MLFF टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। इस तकनीक की मदद से टोल पर किसी बैरियर के जरिए वाहनों को रोके बिना टोल वसूला जाता है, जिससे वाहनों को टोल पर रुकने की जरूरत नहीं होती।
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने खुद अपने हाथों से टोल गेट से बैरियर हटाकर इस प्रणाली का उद्घाटन किया। इस बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 'इस आधुनिक सिस्टम को भविष्य में ट्रैफिक नियमों को लागू करने वाली बड़ी तकनीकों के साथ जोड़ दिया जाएगा। जिसके बाद यह सिस्टम न केवल अपने आप टोल वसूलेगा, बल्कि सीट बेल्ट न लगाने, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने और ट्रैफिक से जुड़े दूसरे अपराधों के लिए चालान जारी करने में भी मदद करेगा।' उन्होंने कहा कि, 'यह दिल्ली में बाधा-मुक्त इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के विस्तार की शुरुआत है, जिसका मकसद ट्रैफिक जाम को कम करना और हाईवे की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है।'
‘यह दिल्ली-NCR क्षेत्र का पहला बैरियर-मुक्त टोल प्लाजा’
उधर इस बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर बताया कि 'अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका टोल प्लाजा में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) आधारित टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया, जो कि दिल्ली-NCR क्षेत्र का पहला बैरियर-मुक्त टोल प्लाजा है।
आगे उन्होंने लिखा कि 'MLFF सिस्टम एक सहज और संपर्क-रहित टोलिंग ढांचा पेश करता है, जो न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ स्वचालित यूजर फीस भुगतान के लिए 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' को FASTag-आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के साथ एकीकृत करता है।'
गडकरी ने बताए इससे होने वाले फायदे
आगे उन्होंने लिखा कि ‘यह डिजिटल राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो यात्रा दक्षता को बढ़ाता है, भीड़भाड़ को कम करता है, ईंधन दक्षता में सुधार करता है और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाता है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि ’यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के देश भर में एक प्रौद्योगिकी-संचालित, कुशल और उपयोगकर्ता-अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क बनाने के विन के अनुरूप है।'
देश में अबतक ऐसे 17 टोल प्लाजा की हुई शुरुआत
प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की योजना दिसंबर 2026 के अंत तक इस तकनीक को अलग-अलग चरणों में करीब 1,300 टोल प्लाजा पर लागू करने की है। उधर इस बारे में जानकारी देते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने बताया कि, अभी इस नए सिस्टम के तहत 17 टोल प्लाजा चालू हैं, जबकि 107 जगहों पर इसे लागू करने के लिए बोलियां चल रही हैं।
गुजरात में शुरू हुआ था देश का पहला सिस्टम
भारत का पहला पूर्ण परिचालन MLFF सिस्टम इसी महीने गुजरात के भरूच टोल प्लाजा पर शुरू किया गया था। वहां के परिणामों ने साबित किया कि इस सिस्टम से न केवल वाहनों की आवाजाही तेज हुई है, बल्कि टोल संग्रह में भी सुधार हुआ है।

पायलट प्रोजेक्ट में मिली बड़ी सफलता
NHAI के चेयरमैन यादव ने बताया कि शुरुआती चरण में ही इस नए सिस्टम से होने वाले फायदे साफ तौर पर नजर आने लगे हैं। उन्होंने कहा, 'MLFF की वजह से टोल कलेक्शन में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है, और ट्रैफिक के सबसे ज्यादा दबाव वाले समय में गाड़ियों को जो कम से कम 5 मिनट तक टोल प्लाजा पर रुकना पड़ता था, वह अब घटकर बिल्कुल खत्म हो गया है।' साथ ही उन्होंने बताया कि करीब 50% ऐसे यूजर्स, जिन्हें टोल न चुकाने के लिए ई-नोटिस भेजे गए थे, उन्होंने 72 घंटे के अंदर ही अपना बकाया चुका दिया और किसी भी तरह के जुर्माने से बच गए।'




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