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यमुना को लेकर NGT सख्त; यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली और हरियाणा को निर्देश

एनजीटी ने दिल्ली सरकार समेत अन्य संबंधित राज्यों को यमुना नदी में पाई जाने वाली मछलियों की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए केंद्रीय मत्स्य अनुसंधान केंद्र की सिफारिशों को लागू करने को कहा है।

Sun, 1 Feb 2026 10:05 PMKrishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली
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यमुना को लेकर NGT सख्त; यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली और हरियाणा को निर्देश

एनजीटी ने दिल्ली समेत उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को यमुना की स्थानीय मछलियों को बचाने के लिए केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र की सिफारिशों को जल्द से जल्द से लागू करने को कहा है। अदालत ने दिल्ली जल बोर्ड और अन्य विभागों को यमुना के किनारे सीवर सफाई प्लांट लगाने और उन्हें ठीक से चलाने का आदेश दिया है ताकि नदी का पानी मछलियों और अन्य जीवों के रहने लायक बन सके।

खुद लिया था संज्ञान

एनजीटी उस मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट पर खुद ही संज्ञान लिया था। इस खबर में प्रयागराज के एक सरकारी सर्वे का जिक्र किया गया था जिसमें बताया गया था कि यमुना नदी में भारत की मछली प्रजातियों की संख्या में कमी आई है। सर्वे आईसीएआर-सीआईएफआरआई (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र) ने किया था।

भारतीय मछलियों की संख्या घटी

सर्वेक्षण के मुताबिक, कतला, रोहू, नयन, पब्दा, गोच, चीतल, टेंगरा, रीठा, बाम और महाशीर जैसी भारतीय मछलियों की संख्या कम हो गई है। इसके विपरीत कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, बिग हेड, थाई मांगुर, ग्रास कार्प, तिलापिया, क्रोकोडाइल फिश और बास जैसी आठ विदेशी मछलियों की संख्या बढ़ गई है। इन विदेशी मछलियों की वजह से भारतीय मछलियों पर बुरा असर पड़ रहा है।

सुधार कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने की जरूरत

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल ने 29 जनवरी को कहा कि नदी में पलूशन की वजह से भारतीय मछलियों की संख्या कम हो रही है। कई संस्थाओं ने इन मछलियों को बचाने की कोशिश की है लेकिन फिर भी उनकी संख्या घटती जा रही है। इसलिए अब इन सुधार कार्यक्रमों की फिर से जांच करना जरूरी है ताकि इन्हें जमीन पर सही तरीके से लागू किया जा सके।

क्या सुझाव?

अदालत ने स्थानीय सरकारों को आईसीएआर- सीआईएफआरआई प्रयागराज के सुझावों को मानने पर जोर दिया है। इन सलाहों में मछली पकड़ने के अवैध सामान पर रोक लगाना और मछली पकड़ने की पाबंदी के समय कड़ी निगरानी रखना शामिल है। साथ ही मछली पालन के सही तरीके अपनाने, खास इलाकों में मछलियों को पालने और मछलियों के पकड़ने का सही रिकॉर्ड रखने की बात भी कही गई है।

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इन राज्यों को आदेश

इन सिफारिशों में मछली पालन के नियमों का पालन करना, नदियों में विदेशी मछलियां डालने पर रोक लगाना और लोगों को जागरूक करना भी शामिल है। साथ ही पानी का बहाव बनाए रखने और गंदगी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की बात भी कही गई है ताकि जलीय पर्यावरण सुरक्षित रहे। एनजीटी ने दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को इन सुझावों को जल्द लागू करने का आदेश दिया है।

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